• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • व्यक्ति वाद नहीं, समाजवाद हमारा लक्ष्य हो(sandesh)
    • दृढ़ इच्छा शक्ति एक चमत्कारी उपलब्धि
    • विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकता
    • महामना मालवीय (kahani)
    • आत्म तत्व की अखंडता
    • आध्यात्मिक क्षमताएं और उनकी उपलब्धि
    • गुलाब के पेड़ पर फूल और कांटे (kahani)
    • धन का उपार्जन और उपयोग नीतिपूर्वक हो
    • हे परम प्रभु हमें पवित्र बनादे
    • अन्धा हाथ में लालटेन लेकर (kahani)
    • अध्यात्म का अभाव ही व्यक्तित्व को विकृत करता है।
    • Quotation
    • मनुष्य क्या था और क्या बनेगा?
    • धर्म साधना (kahani)
    • मानवीय मस्तिष्क ऋद्धि−सिद्धियों का भाँडागार
    • अहंकारी और स्वार्थी मनुष्य (kahani)
    • ताते यह चाकी भली
    • अन्तर्ग्रही आदान−प्रदान की तैयारी
    • भगवान की माया (kahani)
    • परिवर्तन अवश्यंभावी है उसके लिए तैयार रहें
    • देवत्व का वरण करें− असुरता का नहीं
    • मनुष्य सृष्टि का एक तुच्छ सा अल्प संख्यक प्राणी है।
    • अन्तर का परिष्कार सफल जीवन का आधार
    • Quotation
    • किसी का मनोबल न गिरायें साहस प्रदान करें
    • पिछड़ापन अज्ञान का ही प्रतिफल है।
    • Quotation
    • जीवनी शक्ति का अपव्यय− तनाव उत्पन्न करेगा अन्यथा थका देगा
    • चिर यौवन और दीर्घ जीवन की अतृप्त आकाँक्षा
    • गोरी और काली चमड़ी (kahani)
    • सर्वनाश उन्माद को हम मूक दर्शक बनकर न देखें
    • आचार्य की उदारता (kahani)
    • धन दान न सही, हमारे पास और भी बहुत कुछ देने योग्य है।
    • Quotation
    • धन का संग्रह नहीं सदुपयोग किया जाय
    • प्रदर्शन और उद्वेग से बचना ही बुद्धिमत्ता है।
    • Quotation
    • प्रकृति प्रतिकूलता को अनुकूल कैसे बनाया जाय
    • अपनी औकात के अनुसार खर्च (kahani)
    • अपनों से अपनी बात - प्रगतिशील रामायण शिक्षा के लिए आमन्त्रण
    • आज विश्व में ऊंचा कर दो!
    • आज विश्व में ऊंचा कर दो!
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login


Back to Books

Magazine - Year 1975 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN EPUB KINDLE


धन का उपार्जन और उपयोग नीतिपूर्वक हो

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 7 9 Last
बुराई से केवल बुराई ही बढ़ती है। धन यदि बुरे माध्यम से कमाया गया है तो उसका खर्च भी उचित रीति से नहीं हो सकता। जिसने पसीना बहाकर गाढ़ी कमाई से पैसा कमाया है, उसे खर्च करते समय दर्द लगेगा और बार−बार सोचेगा कि इसे किस कार्य के लिए कितनी मात्रा में खर्च करना उचित है? सच बात तो यह है कि हराम की कमाई आडम्बर बनाने, ढोंग रचने और विलासिता के प्रसाधन जमा करने में ही खर्च होती है। इससे अनेक विपत्तियों और व्यथाओं का सामना करना पड़ता है। अनुचित कमाई अपना क्षणिक चमत्कार दिखाकर अन्ततः मनुष्य को अंधकार के गर्त में गिरा देती है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि राष्ट्र का आर्थिक, शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक पतन होता जा रहा है।

आर्थिक व्यभिचार को प्रोत्साहन देने में न केवल अर्थ− पिपासुओं का ही हाथ है वरन् उन अज्ञानियों का भी हाथ समझना चाहिए जो गुणों के स्थान पर धन को आदर देने की भूल करते हैं। आज जिसके पास अधिक धन−सम्पत्ति है, समाज के लोग उसको ही आदर ‘प्रतिष्ठा ‘ देने लगते हैं। वह यह देखना नहीं चाहते कि जो प्रचुर मात्रा में धन एकत्रित किया गया है वह किस मार्ग और उपाय से आया है। बेईमानी पूर्वक धन कमा लेने पर जब अवमानना के स्थान पर सम्मान ही होता है तो कोई वैसा करने में संकोच ही क्यों करे? इस आर्थिक व्यभिचार को कम करने का उपाय यह है कि− धन के स्थान पर गुणों का आदर किया जाय। ऐसे व्यक्तियों का नागरिक अभिनन्दन किया जाय जिन्होंने अपनी ईमानदारी तथा सदाचरण का प्रमाण दिया है, फिर चाहे वह धन के सम्बन्ध में दरिद्री ही क्यों न हो। भ्रष्टाचार से बने हुए धन कुबेर के मुकाबले में वह व्यक्ति जो अपनी छोटी−सी तनख्वाह में सन्तोषपूर्वक गुजर करता है और धन की लिप्सा में न तो किसी को धोखा देता है और न झूठ बोलता है, प्रशंसनीय ही है।

धन कमाने के लिए उचित प्रयत्न करना सराहनीय है। उपार्जन और उत्पादन के लिए प्रयत्नशील रहने से व्यक्ति और समाज की क्षमता बढ़ती है, राष्ट्र की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। प्रगति का पथ−प्रशस्त करने वाले साधनों में एक महत्वपूर्ण वस्तु धन भी है। किन्तु “धन कमाना सरल है उसे खर्च करना कठिन है।” हमारी आर्थिक समस्याओं के पीछे कमाने का इतना दोष नहीं है जितना खर्च करने का। हम नहीं जानते कि हमें किस तरह से खर्च करना चाहिए। जहाँ खर्च नहीं करना चाहिए वहाँ हम पानी की तरह पैसा बहाते हैं और जहाँ खर्च करना चाहिए वहाँ हम रीते ही रह जाते हैं। अपव्यय और कंजूसी दोनों ही बहुत बड़े दोष हैं। बहुत से लोग जीवन भर कमाते ही मर जाते हैं किन्तु अपने और दूसरों के लिए आवश्यक खर्च भी नहीं करते। अपने बच्चों को योग्य बनाने, अपने स्वास्थ्य और रहन−सहन को, सामान्य स्तर पर बनाये रखने के लिए भी खर्च नहीं करते। वे या तो अपनी सन्तानों के लिए कमाते हैं या व्यर्थ नाम के लिए। सन्तानें उस धन का दुरुपयोग करती हैं, सन्तानों को धन नहीं, योग्यता देनी चाहिए। पैसा जहाँ रुकता है वहाँ सड़ता है।

बहुत से लोग नाम के लिए धन खर्च करते हैं वे धर्म या मानव के प्रति कर्त्तव्य भावना से प्रेरित नहीं होते। ऐसे खर्चे और ऐसे व्यक्ति भी प्रशंसा के पात्र नहीं हो सकते। यदि वही धन दीन, दुखियों की सहायता में, मानव मात्र की सेवा में, सद्गुणों के विकास में खर्च किया जाता तो समाज और राष्ट्र का कितना हित होता।

First 7 9 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • व्यक्ति वाद नहीं, समाजवाद हमारा लक्ष्य हो(sandesh)
  • दृढ़ इच्छा शक्ति एक चमत्कारी उपलब्धि
  • विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं कर सकता
  • महामना मालवीय (kahani)
  • आत्म तत्व की अखंडता
  • आध्यात्मिक क्षमताएं और उनकी उपलब्धि
  • गुलाब के पेड़ पर फूल और कांटे (kahani)
  • धन का उपार्जन और उपयोग नीतिपूर्वक हो
  • हे परम प्रभु हमें पवित्र बनादे
  • अन्धा हाथ में लालटेन लेकर (kahani)
  • अध्यात्म का अभाव ही व्यक्तित्व को विकृत करता है।
  • Quotation
  • मनुष्य क्या था और क्या बनेगा?
  • धर्म साधना (kahani)
  • मानवीय मस्तिष्क ऋद्धि−सिद्धियों का भाँडागार
  • अहंकारी और स्वार्थी मनुष्य (kahani)
  • ताते यह चाकी भली
  • अन्तर्ग्रही आदान−प्रदान की तैयारी
  • भगवान की माया (kahani)
  • परिवर्तन अवश्यंभावी है उसके लिए तैयार रहें
  • देवत्व का वरण करें− असुरता का नहीं
  • मनुष्य सृष्टि का एक तुच्छ सा अल्प संख्यक प्राणी है।
  • अन्तर का परिष्कार सफल जीवन का आधार
  • Quotation
  • किसी का मनोबल न गिरायें साहस प्रदान करें
  • पिछड़ापन अज्ञान का ही प्रतिफल है।
  • Quotation
  • जीवनी शक्ति का अपव्यय− तनाव उत्पन्न करेगा अन्यथा थका देगा
  • चिर यौवन और दीर्घ जीवन की अतृप्त आकाँक्षा
  • गोरी और काली चमड़ी (kahani)
  • सर्वनाश उन्माद को हम मूक दर्शक बनकर न देखें
  • आचार्य की उदारता (kahani)
  • धन दान न सही, हमारे पास और भी बहुत कुछ देने योग्य है।
  • Quotation
  • धन का संग्रह नहीं सदुपयोग किया जाय
  • प्रदर्शन और उद्वेग से बचना ही बुद्धिमत्ता है।
  • Quotation
  • प्रकृति प्रतिकूलता को अनुकूल कैसे बनाया जाय
  • अपनी औकात के अनुसार खर्च (kahani)
  • अपनों से अपनी बात - प्रगतिशील रामायण शिक्षा के लिए आमन्त्रण
  • आज विश्व में ऊंचा कर दो!
  • आज विश्व में ऊंचा कर दो!
Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts
We value your thoughts

Write to Us

Share your suggestions, feedback, questions, or experiences with us.

Write to us

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj