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Reading: कुशसन और दुरावस्था (Kahani) · Page 17

कुशसन और दुरावस्था (Kahani)

त्रावनकोर राज्य में कुशसन और दुरावस्था का बोलबाला था। दीवान से लेकर साधारण अहलकार तक आलसी, कर्तव्यभ्रष्ट और भ्रष्टाचारी हो गये थे। गवर्नर जनरल लार्ड डलहौजी ने यह सब देखा तो वह खुद उटकमण्ड आया। उसने त्रावनकोर राज्य को ब्रिटिश भारत में मिला लेने का निश्चय कहला भेजा।

डलहौजी की आज्ञा वज्रपात थी। राजा सन्न रह गये फिर दुःखी स्वर में बोले, “अब कुछ नहीं हो सकता। अब किसी तरह राज्य नहीं बचाया जा सकता।”

तभी एक तीस वर्षीय युवा अधिकारी सामने आया और बोला, “आप गवर्नर जनरल से कुछ समय माँग लीजिये।” अधिकारी योग्य और कर्मठ था। पर राजा को विश्वास न हुआ। वह बोला,”थोड़े समय में तुम क्या कर सकोगे?”

अधिकारी ने आत्म विश्वास से कहा, “एक क्षण की कर्मठता मनुष्य को बदल देती है तो राज्य बदलने के लिए कुछ वर्ष बहुत हैं।”

राजा ने डलहौजी से सात वर्ष का समय माँगा और युवक को दीवान बना दिया। युवक ने अपनी प्रतिभा, दक्षता और कर्मठता से कुछ ही समय में त्रावनकोर राज्य को नयी जिन्दगी दी। युवक थे राजा सर टी रामाराव, जिन्होंने योग्य प्रशासक के रूप में अंग्रेजों से राज और सर की उपाधि अर्जित की।