• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • प्रेम ही प्रार्थना
    • जीवात्मा की क्रमिक विकास−यात्रा
    • मनुष्य की श्रेष्ठता (Kahani)
    • होने जा रहा है अखण्ड भारत का पुनर्जन्म
    • मित्रता और सूझ-बूझ के सहारे कठिनाइयों से पार (Kahani)
    • अज्ञान ही है दुःखों का कारण
    • गुरु धारण करने से पहले गुरु की परीक्षा (Kahani)
    • अब फिर बज उठे रणभेरी
    • अपने आप को सुधारो (Kahani)
    • गायत्री की दो भुजाएँ, योग और तप
    • रुस्तम जी की लगन,हिम्मत और सेवा (Kahani)
    • आचार्य एवं शिष्य के गहन अंतर्संबंध
    • ईर्ष्या से कलुषित क्षेत्र (Kahani)
    • कंप्यूटर का वरदान बन रहा है अभिशाप
    • सत्य और सज्जनता (Kahani)
    • तालमेल बिठाकर जीवन जीना सीखें
    • लालच और भक्ति (Kahani)
    • गायत्री-साधना की सफलता के प्रमुख लक्षण
    • जॉन हंटर की सफलताओं का कारण (Kahani)
    • क्या कोई हमें बुला रहा है सुदूर अंतरिक्ष से
    • नेपोलियन की कर्त्तव्य परायणता (Kahani)
    • आध्यात्मिक जीवन जिएँ, मनोरोगों से दूर रहें
    • दयालुता का प्रदर्शन नहीं,पालन अभीष्ट है (Kahani)
    • बुद्धि नहीं, सद्बुद्धि की शरण में आएँ
    • धर्म-धारणा से ही मनुष्य का कल्याण संभव है (Kahani)
    • आइए अपसंस्कृति की माया को चुनौती दें, विद्याविस्तार करें
    • सेवा-साधना और तत्वज्ञान (Kahani)
    • आयुर्वेद-1 - यज्ञोपचार द्वारा रतिज रोगों की सरल चिकित्सा
    • गुरुचेतना में विलय ही शिष्य का लक्ष्य हो
    • चैक जनरल हैटमैन की चमड़ी का ढोल (Kahani)
    • जन्म−जन्मान्तर तक चलने वाली भावदशा
    • पश्चाताप (Kahani)
    • साधन−सिद्धि गुरुवर पद नेहू
    • ईमानदारी (Kahani)
    • परमपूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी - समस्त सिद्धियों का आधार तप-2
    • श्री गीता पाठ की चमत्कारिक महिमा
    • VigyapanSuchana
    • युगगीता-5 - उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्
    • चेतना की शिखर यात्रा-22 - हिमालय से आमंत्रण-3
    • VigyapanSuchana
    • गुरुकथामृत-5 - गुरु बिन कौन लगाए पार
    • VigyapanSuchana
    • अपनों से अपनी बात - नवसृजन के निमित्त महाकाल तैयार हैं
    • VigyapanSuchana
    • सामाजिक अनुशासन (Kahani)
    • नई राहें
    • नई राहें (Kavita)
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login


Back to Books

Magazine - Year 2003 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN EPUB KINDLE


प्रेम ही प्रार्थना

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last
प्रार्थना का संगीत प्रेम की सरगम से सजता है। प्रेम की सजल संवेदनाओं से ही प्रार्थना के स्वर स्फुटित होते हैं। प्रेम के शब्दों को गूँथकर ही प्रार्थना का काव्य रचा जाता है। भावमय भगवान् केवल भावनाओं की सघन पुकारों को सुने बिना नहीं रहते। संवेदनाओं की सजलता ही उन्हें स्पर्श कर पाती है।

सजल संवेदनाओं, सघन भावनाओं एवं प्रेम की प्रतीति को जो अपने जीवन में घोल देते हैं, उनका जीवन सहज ही प्रार्थनामय हो जाता है। सूफी फकीरों में इस बारे में एक घटना बहुप्रचलित है। सूफी फकीर नूरी को उनके कुछ अन्य फकीर साथियों के साथ काफिर होने का आरोप लगाया गया था। इसके लिए इन सबको मृत्युदण्ड भी सुना दिया था।

मृत्युदण्ड की घड़ी में जब जल्लाद फकीर नूरी के एक साथी के पास नंगी तलवार को लहराता हुआ आया, तो नूरी ने उठकर स्वयं को अपने मित्र के स्थान पर पेश किया। ऐसा करते समय नूरी के चेहरे पर गहरी प्रसन्नता और स्वरों में भरपूर नम्रता थी। इस दृश्य को देखकर दर्शक स्तब्ध रह गए। हजारों की भीड़ एक पल को सहम गयी।

अचरज से भरे जल्लाद ने कहा- हे युवक! तलवार ऐसी वस्तु नहीं है, जिससे मिलने के लिए लोग उत्सुक एवं व्याकुल हों और फिर तुम्हारी तो अभी बारी भी नहीं आयी। जल्लाद की इन बातों पर फकीर नूरी मुस्करा उठे। और कहने लगे- मेरे लिए प्रेम ही प्रार्थना है। मैं जानता हूँ कि जीवन, संसार में सबसे मूल्यवान वस्तु है। लेकिन प्रेम के मुकाबले वह कुछ भी नहीं है। जिसे प्रेम उपलब्ध हो जाता है, उसके लिए सारा जीवन प्रार्थना बन जाता है। और प्रार्थनाशील मनुष्य का कर्त्तव्य है कि जब भी कोई कष्ट आगे आए, तो स्वयं सबसे आगे हो जाओ और जहाँ सुख-सुविधाएँ मिलती हों तो वहाँ पीछे होने की कोशिश करो।

फकीर नूरी की इन बातों ने जता दिया कि प्रार्थना का कोई ढाँचा नहीं होता। वह तो हृदय का सहज अंकुरण है। जैसे पर्वत से झरने बहते हैं, वैसे ही प्रेम पूर्ण व्यक्ति के प्रत्येक कर्म में प्रार्थना की धुन गूँजती है।

2 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • प्रेम ही प्रार्थना
  • जीवात्मा की क्रमिक विकास−यात्रा
  • मनुष्य की श्रेष्ठता (Kahani)
  • होने जा रहा है अखण्ड भारत का पुनर्जन्म
  • मित्रता और सूझ-बूझ के सहारे कठिनाइयों से पार (Kahani)
  • अज्ञान ही है दुःखों का कारण
  • गुरु धारण करने से पहले गुरु की परीक्षा (Kahani)
  • अब फिर बज उठे रणभेरी
  • अपने आप को सुधारो (Kahani)
  • गायत्री की दो भुजाएँ, योग और तप
  • रुस्तम जी की लगन,हिम्मत और सेवा (Kahani)
  • आचार्य एवं शिष्य के गहन अंतर्संबंध
  • ईर्ष्या से कलुषित क्षेत्र (Kahani)
  • कंप्यूटर का वरदान बन रहा है अभिशाप
  • सत्य और सज्जनता (Kahani)
  • तालमेल बिठाकर जीवन जीना सीखें
  • लालच और भक्ति (Kahani)
  • गायत्री-साधना की सफलता के प्रमुख लक्षण
  • जॉन हंटर की सफलताओं का कारण (Kahani)
  • क्या कोई हमें बुला रहा है सुदूर अंतरिक्ष से
  • नेपोलियन की कर्त्तव्य परायणता (Kahani)
  • आध्यात्मिक जीवन जिएँ, मनोरोगों से दूर रहें
  • दयालुता का प्रदर्शन नहीं,पालन अभीष्ट है (Kahani)
  • बुद्धि नहीं, सद्बुद्धि की शरण में आएँ
  • धर्म-धारणा से ही मनुष्य का कल्याण संभव है (Kahani)
  • आइए अपसंस्कृति की माया को चुनौती दें, विद्याविस्तार करें
  • सेवा-साधना और तत्वज्ञान (Kahani)
  • आयुर्वेद-1 - यज्ञोपचार द्वारा रतिज रोगों की सरल चिकित्सा
  • गुरुचेतना में विलय ही शिष्य का लक्ष्य हो
  • चैक जनरल हैटमैन की चमड़ी का ढोल (Kahani)
  • जन्म−जन्मान्तर तक चलने वाली भावदशा
  • पश्चाताप (Kahani)
  • साधन−सिद्धि गुरुवर पद नेहू
  • ईमानदारी (Kahani)
  • परमपूज्य गुरुदेव की अमृतवाणी - समस्त सिद्धियों का आधार तप-2
  • श्री गीता पाठ की चमत्कारिक महिमा
  • VigyapanSuchana
  • युगगीता-5 - उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्
  • चेतना की शिखर यात्रा-22 - हिमालय से आमंत्रण-3
  • VigyapanSuchana
  • गुरुकथामृत-5 - गुरु बिन कौन लगाए पार
  • VigyapanSuchana
  • अपनों से अपनी बात - नवसृजन के निमित्त महाकाल तैयार हैं
  • VigyapanSuchana
  • सामाजिक अनुशासन (Kahani)
  • नई राहें
  • नई राहें (Kavita)
Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts
We value your thoughts

Write to Us

Share your suggestions, feedback, questions, or experiences with us.

Write to us

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj