हमारी वसीयत और विरासत (भाग 157):आत्मीयजन...

कहने को गायत्री परिवार, प्रज्ञा परिवार आदि नाम रखे गए हैं और उनकी सदस्यता का रजिस्टर तथा समयदान-अंशदान का अनुबंध भी है, पर वास्तविकता दूसरी ही है, जिसे हम सब भली भाँति अनुभव भी करते हैं। वह है— जन्म-जन्मांतरों से संग्रहीत आत्मीयता। जिसके पीछे जुड़ी हुई अनेकानेक गुदगुदी उत्पन्न करने वाली घटनाएँ हमें स...

March 10, 2026, 11:35 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 156):आत्मीयज...

साधना से उपलब्ध अतिरिक्त सामर्थ्य को विश्व के मूर्द्धन्य वर्गों को हिलाने-उलटने में लगाने का हमारा मन है। अच्छा होता सुई और धागे को आपस में पिरो देने वाले कोई सूत्र मिल जाते; अन्यथा सर्वथा अपरिचित रहने की स्थिति में तारतम्य बैठने में कठिनाई होगी। मूर्द्धन्यों में सत्ताधीश, धनाध्यक्ष, वैज्ञानिक और मन...

March 10, 2026, 11:18 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 155):तीन संकल...

हमने जैसा कि इस पुस्तक में समय-समय पर संकेत किया है। जैसे हमारे बॉस के आदेश मिलते रहे हैं, वैसे ही हमारे संकल्प बनते, पकते व फलित होते गए हैं। सन् 1986 वर्ष का उत्तरार्द्ध हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण सोपान है। इस वर्ष के समापन के साथ हमारे पचहत्तरवें वर्ष की हीरक जयंती का वह अध्याय पूरा होता है, जिनक...

March 10, 2026, 11:04 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 154): जीवन के...

परिवर्तन और निर्माण दोनों ही कष्टसाध्य हैं। भ्रूण जब शिशुरूप में धरती पर आता है, तो प्रसवपीड़ा के साथ होने वाला खून-खच्चर दिल दहला देता है। प्रस्तुत परिस्थितियों के दृश्य और अदृश्य दोनों ही पक्ष ऐसे हैं, जिनके कण-कण से महाविनाश का परिचय मिलता है। समय की आवश्यकताएँ इतनी बड़ी हैं, जिन्हें पूरा करने के ल...

March 9, 2026, 12:26 p.m.

विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्...

आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, यातायात, सुरक्षा, अनुवाद, भविष्यकथन, सर्च इंजन, हर क्षेत्र में इसकी सशक्त उपस्थिति दर्ज हो रही है। श...

March 8, 2026, 12:01 p.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 153): जीवन के...

कार्यक्रमों में प्रचारात्मक, रचनात्मक और सुधारात्मक अनेक कार्य हैं, जिन्हें घर से बाहर रहते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वित किया जा सकता है। प्रचारात्मक स्तर के कार्य— 1. झोला पुस्तकालय, 2. ज्ञानरथ, 3. स्लाइड प्रोजेक्टर प्रदर्शन, टेपरिकॉर्डर से युगसंगीत एवं युगसंदेश को जन-जन तक पहुँचाना, 4. द...

March 8, 2026, 11:37 a.m.

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 152): जीवन के...

माना कि आज स्वार्थपरता, संकीर्णता और क्षुद्रता ने मनुष्य को बुरी तरह घेर रखा है, तो भी इस धरती को वीर विहीन नहीं कहा जा सकता। 60 लाख साधु-बाबा यदि धर्म के नाम पर घर-बार छोड़कर मारे-मारे फिर सकते हैं, तो कोई कारण नहीं कि मिशन की एक लाख वर्ष की समयदान की माँग पूरी न हो सके। एक व्यक्ति यदि दो घंटे रोज स...

March 8, 2026, 11:29 a.m.

विज्ञान को शैतान बनने से रोकें:अनियंत्रि...

सामान्य व्यक्ति का मस्तिष्क विकृत हो तो वह थोड़े ही व्यक्तियों का अहित कर सकता है। उसी तरह की दुर्बुद्धि वाले लोगों का एक समूह निकल पड़े, तो हानि की सँभावनाएँ निश्चित बढ़ती हैं। किंतु यदि यही रोग राजसत्ताओं में व्याप्त हो जाए, तब तो यह समझना चाहिए कि महायुद्ध, महामरण की सँभावनाएँ ही सुनिश्चित है। रा...

March 6, 2026, 3:45 p.m.

होली...

होली विशेषांक— 4 पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। खीज-क्रोध से उन्मत्त हिरण्यकश्यप जब स्वयं उसे मारने दौड़ा, तो नृसिंह भगवान ने प्रकट होकर उसे समाप्त कर दिया। इस कथा की...

March 6, 2026, 2:03 p.m.

अपनों से अपनी बात- होली का संदेश ...

होली विशेषांक— 3 मातृभूमि की धूलि मस्तक पर लगाकर देशभक्ति की प्रतिज्ञा लेने का महापर्व है— होली। यह असमानता के अभिशाप को जला देने का पर्व भी है। यह पर्व यह संदेश देता है कि आर्थिक−सामाजिक असमानता के रहते हुए हम संतोष के साथ साँस न लें; मिटाकर ही दम लें। सभी इस पर्व पर गले मिलें व राष्ट्र को एक−अखंड ...

March 6, 2026, 1:08 p.m.

Imagination to Innovation: Cultivating C...

The Dev Sanskriti Career Guidance Centre, in collaboration with DISHA (Psychological, Spiritual & Career Counselling Club) – Dev Sanskriti Students Club, organized an engaging session titled “Creative Thinking Studio” under the series “Career Launchpad – A Series on Graduate Attributes,” conducted u...

March 14, 2026, 12:10 p.m.

Department of Computer Science Faculty M...

Under the visionary guidance of Hon’ble Pro Vice Chancellor Dr. Chinmay Pandya Ji, young faculty members from the Department of Computer Science, Dev Sanskriti Vishwavidyalaya actively participated in the Faculty Development Program – “Training of Trainers”, organized by the NIIT Foundation and supp...

March 13, 2026, 4:38 p.m.

From Ideas to Impact: Building Communica...

The Dev Sanskriti Career Guidance Centre, in collaboration with DISHA (Psychological, Spiritual & Career Counselling Club) - Dev Sanskriti Students Club, organized an engaging session titled “Communication in Motion” under the series “Career Launchpad – A Series on Graduate Attributes,” conducted un...

March 13, 2026, 10:53 a.m.

9 से 13 मार्च 2026 तक शांतिकुंज, हरिद्वा...

हरिद्वार, उत्तराखंड  9 से 13 मार्च 2026 तक शांतिकुंज, हरिद्वार में चल रहे उत्तर मध्य रेलवे के 140वें प्रबंधन विकास कार्यक्रम (Management Development Program) के अंतर्गत आज समस्त रेलवे अधिकारियों का आगमन देव संस्कृति विश्वविद्यालय में हुआ।  इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रयागराज, झांसी, आगरा, मुरादाबाद तथ...

March 13, 2026, 10:40 a.m.

Hands-on Session on Project Development ...

Kriti Club (Dev Sanskriti Student’s Club) and Software Development Cell organized a hands-on session on Project Development, Testing, and Project Demonstration today at Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, Haridwar Under the guidance of Hon’ble Pro Vice Chancellor Dr. Chinmay Pandya Ji, Dev Sanskriti Vish...

March 12, 2026, 1:52 p.m.

Empowering the Future: AI Training Works...

Haridwar, March 10, 2026 – The Department of Journalism and Mass Communication at Dev Sanskriti Vishwavidyalaya organized an intensive offline AI Training Workshop under the university’s ADiRA (AI for Digital Readiness & Advancement) Program, under the visionary guidance of Respected Dr. Chinmay Pan...

March 12, 2026, 1:45 p.m.

उत्तर मध्य रेलवे का 140वाँ प्रबंधन विकास...

उत्तर मध्य रेलवे का 140वाँ प्रबंधन विकास कार्यक्रम का शुभारंभ आज शांतिकुंज, हरिद्वार के रामकृष्ण हॉल में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह कार्यशाला 9 मार्च से 13 मार्च 2026 तक आयोजित की जा रही है। इस कार्यक्रम में प्रयागराज मंडल, झांसी मंडल, आगरा मंडल एवं मुरादाबाद मंडल से आए रेलवे के वरिष्ठ अधिका...

March 9, 2026, 4:39 p.m.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ‌8 मार्च 2026 ...

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस ‌8 मार्च 2026 को युग तीर्थ शांतिकुंज में श्रद्धेया शैल जीजी एवं श्रद्धेय डॉ साहब के मार्गदर्शन में शांतिकुंज महिलामंडल द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।    महिला मंडल की अध्यक्षा आदरणीया शेफाली पंड्या जी द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। सर...

March 9, 2026, 4:33 p.m.

International Women’s Day 2026 – “Give t...

Under the guidance of Honorable Pro Vice Chancellor Dr. Chinmay Pandya Ji, Dev Sanskriti Student’s Club and the Department of Computer Science celebrated International Women’s Day on 08 March 2026 with great enthusiasm and inspiration, honoring the remarkable contribution of women in society and tec...

March 9, 2026, 4:23 p.m.

New Milestone in Academic Collaboration:...

Dev Sanskriti Vishwavidyalaya recently signed a Memorandum of Understanding (MoU) with the National Association of Psychological Science (NAPS), Department of Psychology, Faculty of Arts, University of Delhi, marking an important step toward advancing collaborative research and academic cooperation ...

March 9, 2026, 4:09 p.m.
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गुरुदेव से प्रथम भेंट

15 वर्ष की आयु में— बसंत पंचमी पर्व सन् 1926 को स्वगृह— आँवलखेड़ा (आगरा, उत्तर प्रदेश, भारत) में पूजास्थल में ही दादागुरु स्वामी सर्वेश्वरानन्द जी के दर्शन एवं मार्गदर्शन के साथ-ही-साथ आत्मसाक्षात्कार हुआ।

अखण्ड दीपक

सन् 1926 से निरंतर प्रज्वलित दीपक, जिसके सान्निध्य में परम पूज्य गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 24-24 लक्ष के चौबीस गायत्री महापुरश्चरण संपन्न किए, आज भी इसके बस एक झलक भर प्राप्त कर लेने से ही लोगों को दैवीय प्रेरणा और आंतरिक शक्ति प्राप्त होती है। इसके सान्निध्य में अब तक 2400 करोड़ से भी अधिक गायत्री मंत्र का जप किया जा चुका है।

अखण्ड ज्योति पत्रिका

इसका आरंभ सन् 1938 में पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा किया गया था। पत्रिका का मुख्य उद्देश्य— वैज्ञानिक आध्यात्मिकता और 21वीं शताब्दी के धर्म, अर्थात वैज्ञानिक धर्म को बढ़ावा देना है।

गायत्री मन्त्र

दृढ़ निष्ठा से सतत गायत्री साधना करने से मन (अंतःकरण) तीव्र गति और चामत्कारिक प्रकार से पवित्र, निर्मल, व्यवस्थित और स्थिर होता है, जिससे साधक अपने बाह्य भौतिक जीवन की गंभीर परीक्षाओं एवं समस्याओं से जूझते हुए भी अटल आतंरिक शांति और आनंद की अनुभूति करता है।

आचार्य जी ने सिद्धांत और साधना को आधुनिक युग के अनुकूल तर्क व शब्द देकर सामाजिक परिवर्तन का जो मार्ग दिखाया है, उसके लिए आने वाली पीढ़ियाँ युगों-युगों तक कृतज्ञ रहेंगी।

डॉ. शंकर दयाल शर्मा (पूर्व राष्ट्रपति)

मुझे ज्ञात है कि इस विश्वविद्यालय ने स्वतंत्रता सेनानी और लगभग ३००० पुस्तकों के लेखक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्यजी के स्वप्न को साकार रूप दिया है। इन्हें भारत में ज्ञान क्रांति का प्रवर्तक कहना उपयुक्त होगा। आचार्यश्री का विचार था कि अज्ञानता ही निर्धनता और बीमारी आदि सभी समस्याओं की जड़ है।

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम (पूर्व राष्ट्रपति एवं वैज्ञानिक)

आचार्य जी का एकाकी पुरुषार्थ सारे संत समाज की सम्मिलित शक्ति के स्तर का है, उनने गायत्री व यज्ञ को प्रतिबंध रहित करने निमित्त जो कुछ भी किया वह शास्त्रों के अनुसार ही था। मेरा उन्हें बारम्बार नमन है।

स्वामी जयेन्द्रतीर्थ सरस्वती (शंकराचार्य कांची कामकोटि पीठ)

श्रद्धेय आचार्य श्रीराम शर्मा जी ने जो कार्य कर दिखाया वह अद्भुत है, युग के लिए नितांत आवश्यक है। आचार्य जी के साहित्य से मैं बहुत प्रभावित हूँ। प्रज्ञा पुराण ने विशेष रूप से मुझे अपने कार्यों में बहुत बल प्रदान किया है। उनका चिंतन राष्ट्र को शक्तिशाली बनाता और मानव मात्र को सही दिशा प्रदान करता है।

श्री नानाजी देशमुख (संस्थापक ग्रामोदय विश्वविद्यालय)

आचार्य जी द्वारा भाष्य किए गए उपनिषदों का स्वाध्याय करने के बाद उन्होंने कहा कि- ‘‘काश! यह साहित्य मुझे जवानी में मिल गया होता तो मेरे जीवन की दिशाधारा कुछ और ही होती; मैं राजनीति में न जाकर आचार्य श्री के चरणों में बैठा अध्यात्म का ज्ञान ले रहा होता।’’

सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन्

विनोबा जी ने वेदों के पूज्यवर द्वारा किए गए भाष्य को ग्वालियर मेंं एक सार्वजनिक सभा में अपने सिर पर धारण करते हुए कहा- "ये ग्रन्थ किसी व्यक्ति द्वारा नहीं, शक्ति द्वारा लिखे गये हैं।"

आचार्य विनोबा भावे

सुप्रसिद्ध सन्त देवरहा बाबा एक सिद्ध पुरुष थे। उनने एक परिजन से कहा- ‘‘बेटा! उनके बारे में मैं क्या कहूँ? यह समझो कि मैं हृदय से सतत उनका स्मरण करता रहता हूँ। गायत्री उनमें पूर्णतः समा गयी है एवं वे साक्षात् सविता स्वरूप हैं।’’

देवरहा बाबा

‘‘आचार्यश्री ने गायत्री को जन-जन की बनाकर महर्षि दयानन्द के कार्यों को आगे बढ़ाया है। गायत्री और ये एकरूप हो गये हैं।’’

महात्मा आनन्द स्वामी

अपने भावभरे उद्गार पूज्यवर के सम्बन्ध में इस रूप में व्यक्त किए थे- ‘‘आचार्य जी इस युग में गायत्री के जनक हैं। उनने गायत्री को सबकी बना दिया। यदि इसे मात्र ब्राह्मणों की मानकर उन्हीं के भरोसे छोड़ दिया होता तो अब तक गायत्री महाविद्या सम्भवतः लुप्त हो गयी होती।’’

करपात्री जी महाराज