• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • अक्लमन्दी नहीं बुद्धिमत्ता अपनाये।
    • दो पुण्य प्रयास जो इन्हीं दिनों करने हैं।
    • आवश्यक अनुरोध
    • धर्म, विज्ञान और दर्शन का समन्वय
    • पदार्थ और प्राणियों की सामर्थ्य का उद्गम
    • Quotation
    • लो! अब पदार्थ ही मर गया।
    • समस्त सम्भावनाओं से परिपूर्ण मानवीय व्यक्तित्व
    • लिंग भेद शाश्वत नहीं, परिवर्तनशील है!
    • जातस्य हि ध्रुवों मृत्युर्धुवं जन्म मृतस्य च॥
    • संस्कारों की महत्ता एवं उपयोगिता
    • अदृश्य का अनुकूलन आवश्यक अपेक्षित
    • सावधान् स्वर दूषण-त्रिशिरा-मारीच आ रहे हैं
    • अवरोध पुरुषार्थ के निरीक्षक, परीक्षक
    • सहकारिता ही उर्त्कष का आधार
    • विचारों और भावनाओं की शक्ति सामर्थ्य
    • स्वास्थ्य और शान्ति का शत्रु क्रोध
    • तीन महान तथ्य-अनुशासन,संयज एवं संरक्षण
    • गायत्री नगर में देव परिवार
    • विवेकवान् अपना जीवन दर्शन बदलें
    • प्रवाह में न बहते रहें, औचित्य भी देखें
    • प्रभात की पुण्य बेला में आत्म परिवर्तन अपेक्षित....
    • पुण्यात्मा गृहस्थ के घर एक अतिथि बनकर आये (kahani)
    • आत्मोर्त्कष और श्रेय साधना स्वर्णिम अवसर
    • Quotation
    • स्वार्थ और परमार्थ का असाधारण समन्वय
    • Quotation
    • बालको से भी गये बीते
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login





Magazine - Year 1980 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN


तीन महान तथ्य-अनुशासन,संयज एवं संरक्षण

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


First 17 19 Last
संरक्षण और अनुशासन का कितना महत्व है इसे हम पृथ्वी के इर्द-गिर्द चढ़े हुए पर्यावरण को देखकर सहज ही जान सकते है।

शरीर पर जो चमड़ी की परत चढ़ी है उसे संरक्षण कह सकते हैं। इससे भीतर की रक्त, साँस सम्पदा को अपने स्थान पर बने रहने के सुरक्षा मिलती है। हवा में उड़ती रहने वाली विषाक्तता त्वचा के आवरण से ही भीतर नहीं पहुँच पाती अन्यथा धूलिकणों का सीधा प्रवेश रक्त माँस तक जा पहुँता और उस कोमल शरीर सम्पदा का देखते-देखते विषाक्त एवं रुग्ण बना कर रख देता। साथ ही यह भी आश्का बनी रहती है कि भीतर की वस्तु तनिक सा दबाव पड़ते ही बाहर निकल कर इधर उधर छितराने लगती। त्वचा का संरक्षण ही है जो बहुमूल्य कायिक ढाँचे को सुसंचालित रखे रह रहा है।

अभिभावकों का संरक्षण न हो तो शिशुओं का निर्वाह एवं भरण-पोषण किस प्रकार सम्भव हो ? अनुशासन सिखाये बिना वे सभ्यता और शिक्षा का लाभ कैसे ले सकें ?

शासन देश का संरक्षण करता है ओर प्रयाजनों पर अनुशासन रखता है। नागरिकों को दुष्प्रवृतियों से रोकने और उपयुक्त किया-कलाप अपनाने की प्रेरणा देना एवं व्यवस्था जुटाना शासन का काम है। यदि वह इतना न कर सके तो स्वंय नष्ट होगा ओर समूचे प्रजाजनों को डूबेगा। अनुशासन और संरक्षण की व्यवस्था बने रहने से ही व्यक्ति और समाज को मर्यादा में रहने और प्रगति पथ पर अग्रसर होने का सुअवसर मिलता है। इन दो तत्वों को हटा दिया जाय तो फिर उच्छृंखलता, अव्यवस्था, विग्रह और विनाश के दृश्य ही उपस्थित होगे।

न केवल मनुष्यों पर वरन् समूची सृष्टि व्यवस्था पर उन्ही दो दबावों का आधिपत्य है। ब्रह्याण्ड के सभी ग्रह तारक इसी आधार पर गतिशील रहते और अपने-अपने अस्तित्व की रक्षा करते हैं। इसमें तनिक भी शिथिलता आने लगे तो वे अपनी कक्षाओं से भटक कर जिधर-तिधर दौड़ने लगें -उन्हें परस्पर बाँधे रहने वाले अनुशासन आकर्षण समाप्त हो जायें। इस अराजकरता में वे अपने अस्तित्व तक की रक्षा न कर सकेंगे। ब्रह्याण्ड के सुसंचानल में अनेकानेक शक्तियाँ और व्यवस्थाएँ काम करती है। उन सबमें मूर्धन्य आधार दो ही हैं, संरक्षण ओर अनुशासन। इनकी स्िपना के उपरान्त ही प्रगति एवं समृद्धि की अन्यान्य धाराओं का क्रियान्वित हो सकना सम्भव होता है।

अपनी पृथ्वी को ही लें। उसकी सत्ता और व्यवस्था के कण-कण में यही तथ्य द्रष्टिगोचक होता है। जिधर भी द्रष्टि डाली जाय उधर ही क्षण-क्षण में उसी संचालन सूत्र का परिचय मिलता है। जीवधारियों की अपनी नीति मर्यादा है। जो उसे पालते हे वे जीवित रहते और प्रगति करते है। जो व्यतिवम पर उतारु होते हैं- उच्छृंखलता बरतते हैं वे स्वयं नष्ट होते हैं और सम्बद्ध प्राणियों तथा पदार्थों के लिए संकट उत्पन्न करते है। अणु-परमाणुओं से लेकर रासायनिक परिवर्तनों तक के मध्य में उसी व्यवस्था का आधिपत्य है। समूचा लोक व्यवहार इन्ही सूत्रों पर आधारित है। शिथिलता एवं उच्छृंलता उत्पन्न होते ही अनेकानेक समस्याएँ और विभीषिकाएँ सामने आ खड़ी होती है।

नियन्त्रण भी प्रगति प्रयासों के साथ जुड़ा रहता है। नर नारी एक दूसरे के पूरक है। एक से दूसरे की अनेकों सुख सुविधाएँ मिलती है। किन्तु साथ ही एक-दूसरे की सुरक्षा सभी रखते, सरक्षण रखते तथा भीतरी बाहरी अवाँछनीयता की रोकथाम करते है। दाम्पत्य जीवन के अनेकों लाभों में सुरक्षा और सुव्यवस्था मुख्य है उन्हें संरक्षण और अनुशासन भी कहा जा सकता है। इसे दोनों समान रुप से बरतते हैं। पत्नी व्रत और पतिव्रत इसी नैतिक सुनियाजन का नाम है।

पृथ्वी के ऊपर 5 कि.मी से 26 कि.मी. तक जैसे-जैसे ऊपर बढ़ते हैं तापक्रम कम हो जाता है। ओर अन्तत -45 से. ग्रे. तक पहुँच जाता है। 5 कि.मी. से 13 कि.मी. का क्षेत्र ट्रोपोस्फीयर कहलाता है। इससे आगे ट्रैटोस्फीयर आरम्भ होता है जो 40 कि.मी. तक है इस क्षेत्र में क्रमशः तापक्रम बढ़ता तथा-35 से. ग्रे. तक जा पहुँचता है। ओजोन की परत इसी क्षेत्र में होती है। 20 से 240 कि.मी. तक का क्षेत्र ट्रेटापोज है। इसे रेडियो एक्टिव क्षेत्र भी कहा जाता है। रेडियो एक्टिव विकिरणों का सर्वाधिक तरंग दैर्ध्य 2500 इस क्षेत्र में पाया जाता है।

यह एक प्रकार की संरक्षण परतें हैं जिसके कारण अन्तरिक्ष के विकिरणों का धरती पर अनावश्यक प्रवेश न हो सके। साथ ही धरती की ऊर्जा एवं सम्पदा आकाश में उड़कर नष्ट भ्रष्ट न होने लगे।

वातावरण एक छाते की तरह हे जो हमें हानि-कारक अन्तरिक्षीय विकिरणों से बचाता है। ओजोन जैसी सक्रिय गैसे अन्तरिक्षीय विकिरणों को रोकती तथा उनके हानिकारक प्रभाव से हमारी सुरक्षा करती हैं। अमेरिकी सर्वेक्षण द्धारा यह ज्ञात हुआ है कि ऊँची हवाई जहाजों की उड़ानों से ओजोन की यात्रा वातवरण में कम होती जा रही है जिससे रेडियों एक्टिव विकिरणों ओजोन परत को छोड़कर पृथ्वी पर आ रही हैं। जिसके प्रभाव से चमड़ी में जलन, कैन्सर जैसी बीमारियाँ बढ़ रही है। पेड़ पौधों के विकास में बाधा पड़ती है। वातावरण में असामान्य परिवर्तन होता है। सूखा बाढ़, तूफान आता है। ओजोन परत सूर्य से उत्सर्जित 1650 से 3200 की तरंग दैर्ध्य वाली गामा किरणों को अवशोषित कर लेती है।सर्व विदित है कि ‘गामा’ किरणें विषैली होती है। पर सुपरसेनिक ट्रान्सपोर्ट एयर क्राफ्ट इस ओजोन रक्षा कवच का क्षति पहुँचाते हैं। जहाजों की ऊँची उड़ानों को रोकने के लिए अमेरिका द्धारा एक प्रोग्राम क्लाइयेटिक इम्पैक्ट एससमेन्ट भी चलाया गया था। सुपरसोनिक ट्रान्सपोर्ट से दो प्रकार की हानियाँ होती है। (1) यानो से निकलने वाली एक्जास्ट गैसें नाइट्रस आक्साइड नाइट्रिक आक्साइड ओजोन से मिलकर आक्सीजन बनाते हैं (2) ऊँची उड़ान भरने वाला कार्न्कडयान ऐरोसाल स्प्रै निकलता है जिसमें क्लोरीन की बहुलता होती है जो ओजोन के साथ क्रियाशील होकर आक्सीजन बनाता है। इस प्रकार ओजोन की रक्षा परत नष्ट हाती जाती है। इस स्थिति को देखतेहु अमेरिका सरकार ने कार्न्कड विमानों को अपने ऊपर से उड़ान भरने से रोक लगा दी हैं।

वैज्ञानिक प्रयोगों द्धारा यह सिद्ध हुआ है कि घटती हुई ओजोन की यात्रा मानव जाति के लिए हानिकारक सिद्ध होती। ‘वातावरण में एक प्रतिशत ओजोन की कमी होने से रेडियो एक्टिव विकिरण जिसे यू.पी.वी. फलक्स कहते हैं। दुगुना हो जाता है । जिसके फलस्वरुप प्रतिवर्ष 200000 व्यक्ति कैन्सर के शिकार होते है। ओजोन की कमी के कारण पौधों में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया धीमी हो जाती है। जिसके कारण उनकी वृद्धि रुक जाती है। वातावरण में असन्तुलन पैदा होता है। नवीन आँकड़ो के अनुसार सन् 1025 तक दुनिया की आबादी दुगुनी हो जाती है। जबकि अनाज की वृद्धि कम हो रही है। वर्तमान वृद्धि को देखते हुए हवाई उड़ाने 6 गुनी हो जायगी। वायु प्रदूषण कितनी तेजी से बढ़ रही हैयह उपरोक्त आँकड़े बताते हैं। इसी का ध्यान में रखकर सी.ओ. ए.पी. प्रोगाम का गठन किया गया है।

सृष्टि क्रम एवं पृथ्वी का वातवरण एक संरक्षण नियन्त्रण व्यवस्था के अर्न्तगत ही सुरक्षित एवं गतिशील है। मनुष्य के लिए भी यह अनुशासन अभीष्ट है। उसे जब दूरदर्शी बुद्धिमता के साथ स्वेच्छा पूर्वक अपनाया जाता है तो उसे संयम कहते है। संयम की महिमा सर्वविदित है।

First 17 19 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • अक्लमन्दी नहीं बुद्धिमत्ता अपनाये।
  • दो पुण्य प्रयास जो इन्हीं दिनों करने हैं।
  • आवश्यक अनुरोध
  • धर्म, विज्ञान और दर्शन का समन्वय
  • पदार्थ और प्राणियों की सामर्थ्य का उद्गम
  • Quotation
  • लो! अब पदार्थ ही मर गया।
  • समस्त सम्भावनाओं से परिपूर्ण मानवीय व्यक्तित्व
  • लिंग भेद शाश्वत नहीं, परिवर्तनशील है!
  • जातस्य हि ध्रुवों मृत्युर्धुवं जन्म मृतस्य च॥
  • संस्कारों की महत्ता एवं उपयोगिता
  • अदृश्य का अनुकूलन आवश्यक अपेक्षित
  • सावधान् स्वर दूषण-त्रिशिरा-मारीच आ रहे हैं
  • अवरोध पुरुषार्थ के निरीक्षक, परीक्षक
  • सहकारिता ही उर्त्कष का आधार
  • विचारों और भावनाओं की शक्ति सामर्थ्य
  • स्वास्थ्य और शान्ति का शत्रु क्रोध
  • तीन महान तथ्य-अनुशासन,संयज एवं संरक्षण
  • गायत्री नगर में देव परिवार
  • विवेकवान् अपना जीवन दर्शन बदलें
  • प्रवाह में न बहते रहें, औचित्य भी देखें
  • प्रभात की पुण्य बेला में आत्म परिवर्तन अपेक्षित....
  • पुण्यात्मा गृहस्थ के घर एक अतिथि बनकर आये (kahani)
  • आत्मोर्त्कष और श्रेय साधना स्वर्णिम अवसर
  • Quotation
  • स्वार्थ और परमार्थ का असाधारण समन्वय
  • Quotation
  • बालको से भी गये बीते
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj