सबसे बड़ा अजूबा मनुष्य
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संसार में आश्चर्यजनक दृश्यों की गणना 7 में गिनी जाती है। यह मान्यता एवं किंवदंती रही तो बहुत समय से, पुरातन काल से है, पर साथ ही यह भी निश्चित है कि उनकी संख्या न्यूनाधिक होती रही। सात प्रख्यात अजूबों की गणना की जाती रही है। पर ऐसा नहीं हुआ कि एक बार जो कहा गया उसे पत्थर की लकीर मान लिया गया हो। उसमें समय-समय पर परिवर्तन होते रहे हैं।
कभी (1) मिश्र के पिरामिड (2) बेबीलोन के बगीचे (3) ग्रीस में ज्यूइस की मूर्ति (4) एपीसस में आर्टिमस का मंदिर (5) यवन द्वीप की राडेस प्रतिमा (6) सम्राट मुसलिस की समाधि (7) फेरोहा का प्रकाश स्तंभ।
जिनके निर्माण में असाधारण बुद्धि-कौशल, कलाकारिता एवं विपुल संपदा का नियोजन हुआ है। इन्हें देखने के लिए उत्सुक साधन संपन्न व्यक्ति विश्व भ्रमण करते हुए जाया करते थे। उनमें से अधिकांश को देखने जाते समय समुद्र पार करने पड़ते थे। उस जमाने में नौकायन ही विदेश यात्रा का प्रमुख माध्यम था। मस्तूल वाले बड़े-बड़े जहाज हजारों यात्रियों को, टनों असबावों को, एक देश से समुद्र पार कर दूसरे देश में पहुँचाते थे। उन दिनों सड़कें कम थीं। जो थीं वे सुव्यवस्थित भी नहीं थीं और चोर डाकुओं से सुरक्षित भी नहीं। इसलिए स्थल की गुंजाइश होते हुए भी लोग लंबा चक्कर काटकर दूरवर्ती यात्राएँ संपन्न करते थे। महत्वपूर्ण निर्माणों में से अनेक जराजीर्ण होकर ध्वस्त होते रहे और अन्य स्थानों पर नए निर्माण खड़े होते रहे। इसलिए पुरातन सप्त प्रसिद्धियों में परिवर्तन होता रहा। कुछ घटते और कुछ बढ़ते रहे। ईसा की छठीं शताब्दी में सेंट ग्रेउटी ने विश्व भ्रमण करके सप्त आश्चर्यों की नई सूची बनाई थी। (1) सागर में उठते ज्वार भाटे (2) बीज से वनस्पति उगना (3) मनुष्य का पुनर्जन्म (4) ग्रीनोवल का जल स्रोत,जिसमें आग पानी एक साथ निकलते थे (5) माउण्ट एटना (6) सूर्य की ऊर्जा (7) चन्द्रमा की घटती-बढ़ती कलाएँ। इन्हें प्रकृति के आश्चर्यों की संज्ञा दी गई थी। 18 वीं शताब्दी में जो आश्चर्य थे उन्हें (1) अमेरिका के ग्रोथकेयसे (2) ब्राजील का जनैरी बंदरगाह (3) अर्जेंटाइना का द्यामवास जलप्रपात (4) कैलीफोर्निया की योसेमाइट घाटी (5) हिमालय की एवरेस्ट चोटी (6) मिस्र की नील नदी (7) उत्तरी ध्रुव के प्रकाश पुंज के रूप में सूचीबद्ध किया गया। इसके बाद की सूची में (1) पनामा नहर (2) ताजमहल (3) न्यूयार्क की एक पाया बिल्डिंग (4) मिस्र के पिरामिड (5) गीजा की महान मूर्ति (6) हेडिया सोपालिस्य (7) पीसा की मीनार आते हैं । उन्नीसवीं शताब्दी में विज्ञान के आविष्कारों की धूम रही और उस आधार पर जो नए निर्माण हुए उन्हें देखने के लिए लोग उत्सुकतापूर्वक पहुँचते थे। एक दो सहस्राब्दी पुराने तीर्थ स्थानों और स्मारकों की टूट फूट को दुरुस्त करके उन्हें दर्शनीय बनाए रखा गया। पैग्ंबरों और धर्माचार्यों के कार्यक्षेत्र भी दर्शनीय बने। जो देव प्रतिमाओं के लिए बनाये गये। वे भी क्षेत्रीय तथा श्रद्धा संदोह के आधार पर अपनी-अपनी जगह दर्शनीय बने हुए संदोह के आधार पर अपनी अपनी जगह दर्शनीय बने। जो देव प्रतिमाओं के लिए बनाए गए। वे भी क्षेत्रीय तथा श्रद्धा संदोह के आधार पर अपनी-अपनी जगह दर्शनीय बने हुए हैं। सबसे बड़ा अजूबा है स्वयं मनुष्य, जो इच्छानुसार गिरगिट की तरह रंग बदलता रहता है। कभी पशु, कभी प्रेत-पिशाच, कभी देव-दानव और कभी संत-सुधारक, उद्धारक बन जाता है।
जिनके निर्माण में असाधारण बुद्धि-कौशल, कलाकारिता एवं विपुल संपदा का नियोजन हुआ है। इन्हें देखने के लिए उत्सुक साधन संपन्न व्यक्ति विश्व भ्रमण करते हुए जाया करते थे। उनमें से अधिकांश को देखने जाते समय समुद्र पार करने पड़ते थे। उस जमाने में नौकायन ही विदेश यात्रा का प्रमुख माध्यम था। मस्तूल वाले बड़े-बड़े जहाज हजारों यात्रियों को, टनों असबावों को, एक देश से समुद्र पार कर दूसरे देश में पहुँचाते थे। उन दिनों सड़कें कम थीं। जो थीं वे सुव्यवस्थित भी नहीं थीं और चोर डाकुओं से सुरक्षित भी नहीं। इसलिए स्थल की गुंजाइश होते हुए भी लोग लंबा चक्कर काटकर दूरवर्ती यात्राएँ संपन्न करते थे। महत्वपूर्ण निर्माणों में से अनेक जराजीर्ण होकर ध्वस्त होते रहे और अन्य स्थानों पर नए निर्माण खड़े होते रहे। इसलिए पुरातन सप्त प्रसिद्धियों में परिवर्तन होता रहा। कुछ घटते और कुछ बढ़ते रहे। ईसा की छठीं शताब्दी में सेंट ग्रेउटी ने विश्व भ्रमण करके सप्त आश्चर्यों की नई सूची बनाई थी। (1) सागर में उठते ज्वार भाटे (2) बीज से वनस्पति उगना (3) मनुष्य का पुनर्जन्म (4) ग्रीनोवल का जल स्रोत,जिसमें आग पानी एक साथ निकलते थे (5) माउण्ट एटना (6) सूर्य की ऊर्जा (7) चन्द्रमा की घटती-बढ़ती कलाएँ। इन्हें प्रकृति के आश्चर्यों की संज्ञा दी गई थी। 18 वीं शताब्दी में जो आश्चर्य थे उन्हें (1) अमेरिका के ग्रोथकेयसे (2) ब्राजील का जनैरी बंदरगाह (3) अर्जेंटाइना का द्यामवास जलप्रपात (4) कैलीफोर्निया की योसेमाइट घाटी (5) हिमालय की एवरेस्ट चोटी (6) मिस्र की नील नदी (7) उत्तरी ध्रुव के प्रकाश पुंज के रूप में सूचीबद्ध किया गया। इसके बाद की सूची में (1) पनामा नहर (2) ताजमहल (3) न्यूयार्क की एक पाया बिल्डिंग (4) मिस्र के पिरामिड (5) गीजा की महान मूर्ति (6) हेडिया सोपालिस्य (7) पीसा की मीनार आते हैं । उन्नीसवीं शताब्दी में विज्ञान के आविष्कारों की धूम रही और उस आधार पर जो नए निर्माण हुए उन्हें देखने के लिए लोग उत्सुकतापूर्वक पहुँचते थे। एक दो सहस्राब्दी पुराने तीर्थ स्थानों और स्मारकों की टूट फूट को दुरुस्त करके उन्हें दर्शनीय बनाए रखा गया। पैग्ंबरों और धर्माचार्यों के कार्यक्षेत्र भी दर्शनीय बने। जो देव प्रतिमाओं के लिए बनाये गये। वे भी क्षेत्रीय तथा श्रद्धा संदोह के आधार पर अपनी-अपनी जगह दर्शनीय बने हुए संदोह के आधार पर अपनी अपनी जगह दर्शनीय बने। जो देव प्रतिमाओं के लिए बनाए गए। वे भी क्षेत्रीय तथा श्रद्धा संदोह के आधार पर अपनी-अपनी जगह दर्शनीय बने हुए हैं। सबसे बड़ा अजूबा है स्वयं मनुष्य, जो इच्छानुसार गिरगिट की तरह रंग बदलता रहता है। कभी पशु, कभी प्रेत-पिशाच, कभी देव-दानव और कभी संत-सुधारक, उद्धारक बन जाता है।

