नेपाल में भीषण बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए गायत्री परिवार की संवेदनशील सेवा पहल
हरिद्वार, 27 अगस्त 2026
नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा और विनाशकारी बाढ़ ने जनजीवन को गहरे संकट में डाल दिया है। अनेक परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, अनेक घर उजड़ गए हैं और बड़ी संख्या में लोग जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विपदा की ऐसी घड़ी में शब्दों से अधिक आवश्यकता उस आत्मीय संवेदना की होती है, जो पीड़ितों के दुःख को अपना समझकर उनके साथ खड़ी हो।
इसी मानवीय करुणा और सेवा-भाव से प्रेरित होकर अखिल विश्व गायत्री परिवार नेपाल के आपदाग्रस्त परिवारों के साथ खड़ा हुआ है। गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेया शैल जीजी एवं उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या जी के मार्गदर्शन में शांतिकुंज, हरिद्वार से राहत सामग्री नेपाल भेजी जा रही है। इस सेवा कार्य के लिए शांतिकुंज के लगभग 50 नेपाली कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय गायत्री परिजनों का सेवाभावी दल प्रभावित क्षेत्रों की ओर रवाना हो रहा है। दल द्वारा जरूरतमंद परिवारों तक तिरपाल, राशन, आवश्यक दवाइयाँ तथा दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली अन्य जरूरी सामग्री पहुँचाई जाएगी।
गायत्री परिवार की इस सेवा पहल के मूल में परमपूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी एवं वंदनीया माताजी भगवती देवी शर्मा जी की करुणा, सेवा और लोकमंगल की प्रेरणा निहित है। परमपूज्य गुरुदेव ने अपने जीवन-दर्शन के माध्यम से यह संदेश दिया कि अध्यात्म की सार्थकता मानवता के कल्याण और पीड़ितों की सेवा में है। वंदनीया माताजी ने अपने मातृवत स्नेह और करुणामयी जीवन से यह प्रेरणा दी कि दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझकर उनके कष्टों को दूर करने के लिए आगे बढ़ना ही सच्ची मानवीय संवेदना है। नेपाल की इस पीड़ादायक घड़ी में गायत्री परिवार का यह प्रयास उसी ऋषि-चेतना और मानवीय सेवा-परंपरा का विनम्र विस्तार है।
यह सहायता केवल राहत सामग्री का प्रेषण नहीं है, बल्कि उन परिवारों के प्रति आत्मीयता, अपनत्व और संवेदना की अभिव्यक्ति है, जिनका जीवन इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जिस परिवार का आशियाना उजड़ गया है, उसके लिए एक तिरपाल केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि सिर पर छत और सुरक्षा का विश्वास है। अभाव से जूझते परिवार के लिए राशन केवल खाद्य सामग्री नहीं, बल्कि यह भरोसा है कि कठिन समय में कोई उनके साथ खड़ा है। इसी प्रकार आवश्यक दवाइयाँ पीड़ा के बीच राहत और आशा का माध्यम बनती हैं।
