यह नन्हे माटी के दीपक ही जगती की आशाओं मनु संतानोंइन संकल्प स्वरों की गरिमा को पहचानो
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महाराज जनक को समझाते हुए महर्षि याज्ञवल्क्य ने कहा था समय कठिन हो, तो भी यज्ञ परम्परा नहीं रुकनी चाहिये चाहे वह भावनाओं की अग्नि में संकल्पों की समिधाओं से ही क्यों न सम्पन्न हो।
दीपयज्ञों की अभिनव शृंखला उस पुरातन मान्यता का अभिनव संस्करण है। वह कितना महत्वपूर्ण है? इसका प्रमाण इस अभियान का श्रीगणेश करने वाले इन समाचारों से मिलता है। छोटे होने पर भी इन आयोजनों की परिणति कितनी उल्लेखनीय होगी इसका इनसे सहज ही अनुमान किया जा सकता है।
चौबीस महायज्ञ
इन्दौर (म.प्र.) नगर पार्षद एवं कर्मठ प्रज्ञापुत्र श्री भवानी कश्यप ने अपने सहयोगियों सर्वश्री वंकटलाल, शि. कु. शर्मा तथा हरिनारायण शर्मा सहित 24 स्थानों में 108 थालों वाले दीप यज्ञ करने का संकल्प लिया है। श्री कश्यप घर- घर तुलती अभियान के अंतर्गत 2400 तुलसी पौधों की जीवंत प्राण प्रतिष्ठा का चुके है।
घर-घर ज्योति जले
पार्टी (खरगोन) श्रीमती सुमन गुप्ता शरद पूर्णिमा के शतकुँडी दीप यज्ञ को व्यापक बनाने के लिये घर-घर संपर्क साध रही है। वे परिवार निर्माण के लिये महिलाओं से कोई न कोई व्रत और संकल्प भी कराती है ऐसे 1000 संकल्प कराने का उनका लक्ष्य है।
बोलता क्षेत्र बोलती दीवारें
बालोद (दुर्ग) दीप यक्ष की शृंखला के साथ- साथ सारे क्षेत्र की दीवारों में आदर्श वाक्य लिखने का सघन कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया है। अधिवक्ता श्री धन्नू लाल साव अपने सहयोगियों सहित अपना सारा खाली समय इसी प्रयोजन में लगा रहे है।
शिथिलता, गति में बदली
शेरगढ (राजनादगाँव) 1000 दीप यज्ञों के संकल्प ने समूचे क्षेत्र में मिशन की नई हलचल पैदा कर दी है। बुद्धिजीवी वर्ग इस अभिनव कार्यक्रम को आज की सामयिक आवश्यकता और व्यक्ति निर्माण का सुनिश्चित आधार बता रहे है।
बुलाने से पहले
देवगढ़। सजी सजाई 51 थालियों का अभिनव किन्तु अभूतपूर्व दीपयज्ञ भाद्रपद पूर्णिमा पर स्थानीय जवाहर इंटर कालेज के प्राँगण में सम्पन्न हुआ। घर - घर एक थालें के दीप यज्ञ की घोषणा करते ही अपने घर आयोजन रखने वालो की भीड़ उमड़ पड़ी। इस स्थिति में यह निश्चित किया गया है कि जिस घर से नशेबाजी तथा माँसाहार की बुराई त्यागने तथा न्यूनतम 5 वृक्ष लगाने का अनुबंध पालन किया जायेगा वही आयोजन होगे। इस शर्त पर भी प्रायः एक सौ घरों के आयोजन उसी समय निश्चित हो गये।
6 मास की जागरण ज्योत
कनाडिया (इन्दौर) शाखा के कर्मठ कार्यकर्ता सर्वश्री गंगाराम चौधरी, महादेश शर्मा, वासुदेव, सतीश वर्मा तथा शिव नारायाण मंडलोई ने अश्विन नवरात्रि से चैत्र नवरात्रि तक निरंतर घर-घर दीप यज्ञ सम्पन्न करने का निश्चय कर जनसंपर्क प्रारम्भ कर दिया। वे समीपवर्ती गाँवों में भी यह आयोजन सम्पन्न करेंगे। हर व्यक्ति से एक बुराई छुड़वाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
शक्तिपीठ में पुनर्जीवन
रंगई खुर्द (जयसमुन्द) दीप यज्ञों की घोषणा ने प्रज्ञा पीठ में नया जीवन डाल दिया। 15 अगस्त से नियमित प्रौढ़ पाठशाला तथा बाल संस्कार शाला प्रारम्भ कर दिये गये। इससे पहले ट्रस्टी श्री राम सजीवन दुबे की ओर से 24 व्यक्तियों का दीपयज्ञ सम्पन्न हुआ जो बहुत ही भव्य और आकर्षक था। इस अवसर पर 52 लोगों की बीड़ी, सिगरेट न पीने की प्रतिज्ञा की। घर-घर दीप यज्ञ का क्रम उत्साह पूर्वक प्रारम्भ हो गया।
दीप ज्योति अर्थात् अशिक्षा निवारण
भनसुली (दुर्ग) नशा निवारण तथा हरीतिमा संवर्धन के अतिरिक्त साक्षरता विस्तार की व्यापक रूपरेखा बनाई गई है। यह कार्यक्रम विस्तार की व्यापक रूपरेखा बनाई गई है। तथा कार्यक्रम दीपयज्ञ के साथ साथ चलाने का संकल्प स्थानीय कार्यवाहक श्री मनोहर लाल साहू ने लिया है।
व्यापक समर्थन
उतई (दुर्ग) 10 स्थानों में 108 दीप यज्ञ सम्पन्न करने का अभियान उत्साहपूर्ण वातावरण में चल रहा है इन यज्ञों में सम्मिलित होने वालो में से प्रत्येक को कोई न कोई बुराई छोड़ने और अच्छाई ग्रहण करने का आग्रह किया जाता है। श्री लोकनाथ साहू तथा उनके सहयोगियों के इस कार्य को व्यापक समर्थन मिल रहा है।
काम गायत्री धाम के
बेलादुला (रायगढ) शक्तिपीठ के तत्वावधान में चैत्र की नवरात्रि तक एक हजार दीप यज्ञ सम्पन्न करने का श्री गणेश किया गया। सर्वश्री कालीदीन चौबे, हरीराम साहू तथा श्याम लाल रवानी ने मिलकर यह संकल्प पूरा करने का निश्चय किया। दीप यज्ञ के साथ-साथ बुराइयाँ छुड़ाने तथा सत्संकल्प धारण करने का क्रम भी चलेगा।
शानदार प्रथम प्रदर्शन
गहाई (फतेहपुर) दीप यज्ञ का प्रथम 24 कुण्डों का आयोजन बहुत प्रभावोत्पादक रहा। 24 थालियों में 5-5 दीपों अगरबत्तियों से पूरा वातावरण प्रकाशमय हो उठा। सारा कर्मकांड शान्ति कुंज से प्रदर्शन देखकर लौटे सर्वश्री राम निहोरे शुक्ल, बसन्त लाल पाणिग्रही, राम सिंह यादव तथा श्री कान्त द्विवेदी ने समवेत स्वर से कराया। उपस्थित तीन सौ बहत्तर व्यक्तियों में से 89 व्यक्तियों ने नशेबाजी, गाली-गलौच, क्रोध, माँसाहार आदि बुराइयों का परित्याग किया। उसी दिन से प्रौढ़ पाठशाला भी प्रारम्भ की गई, जिसमें अभी 27 प्रौढ़ सम्मिलित हुये।
बृहत् व्यापक, विशाल विराट
दुर्ग (म.प्र.) शरद पूर्णिमा को बृहत् घर-घर दीप यज्ञों की व्यापक शृंखला एवं 108 दीपकों का यज्ञ, तत्पश्चात दीवारों में 1008 सद्वाक्य लेखन जिससे जड़ भी नव निर्माण का संकल्प दुहराये, 108 व्यक्तियों से अपने या अपने बालकों के दहेज और धूम-धाम सहित सादगी सम्पन्न आदर्श विवाह सम्पन्न कराने की प्रतिज्ञायें कराना, 501 व्यक्तियों से नशे की आदतें छुड़ाकर उन्हें धीमी आत्महत्या से बचाना और 108 लोगों के जन्म दिन संस्कार सम्पन्न कराकर चैत्र नवरात्रि पर विशाल पूर्णाहुति कार्यक्रम सम्पन्न कराकर चैत्र नवरात्रि पर विशाल पूर्णाहुति कार्यक्रम सम्पन्न करना, यह विराट योजना कर्मठ कार्यकर्ता सर्वश्री हरीशंकर उजाला, भीमवली तिवारी तथा कान्ता सक्सेना ने बनाई और उसका तत्काल क्रियान्वयन प्रारम्भ कर दिया है।
इसी जन्म में
पुर मंडावली (बिजनौर) दीप यज्ञों का संकल्प लेकर लौटे श्री जयपाल सिंह के अनुसार इन आयोजनों का जन-मानस पर अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा है। जिस घर आयोजन हुआ, हर किसी ने कोई न कोई बुराई छोड़ी। एक सज्जन शराब के बहुत आदी थे, जब उनसे देव दक्षिणा में शराब छोड़ने का आग्रह किया गया तो उनकी माँ ने कहा-यह सौ जन्म में शराब नहीं छोड़ सकता। वह भाई मुस्कराये-बोले इसी जन्म में क्यों नहीं? और उस दिन से उन्होंने उसे हाथ भी नहीं लगाया।
संकल्पपूर्ति के प्रयास
खरगोन (म.प्र.) कर्मठ परिजनों ने हरिद्वार कार्यकर्ता सम्मेलन से वापस आते ही नय संदर्भ में सक्रिय प्रयास प्रारम्भ कर दिए। शरद पूर्णिमा से दीपयज्ञ अभियान प्रारम्भ होगा ही, परन्तु अभी से संपर्क क्षेत्र में, विभिन्न ग्रामों, शाखाओं में दीपयज्ञ का स्वरूप समझाने का क्रम प्रारम्भ किया है। संकल्प एक हजार का है, परन्तु सम्भावना इससे कई गुनी बनी गयी है। दीपयज्ञ के साथ संकल्प अभियान जुड़ा हुआ है। इसके लिए भी परिजनों में भारी उत्साह उभरा है। जन संपर्क पूर्वक याजक बनाने का क्रम आशातीत गति से चल पड़ा है।
हरीतिमा संवर्धन भी
खिलीचीपुरा (शाजापुर म.प्र.) दीप यज्ञ के लिए याजक बनाने प्रारम्भ कर दिये गये हैं। साथ ही हरीतिमा संवर्धन कार्यक्रम को गति देने का निर्णय हुआ है। कई परिजनों ने उसके निमित्त अपने यहाँ पौध तैयार करके निःशुल्क देने की व्यवस्था भी बना ली है।
प्रौढ़ शिक्षा का उत्साह जगा
बड़वानी (खरगोन म.प्र.) सम्मेलन से लौटते ही परिजन सक्रिय हो उठे है। स्थानीय कार्यकर्ता - जो शान्ति-कुंज नहीं गये थे, उन्हें एकत्रित करके सारे निर्धारण बतलाये समझाये गये सभी में नय उमंग जागी है। प्रौढ़ शिक्षा के लिए पढ़े-लिखे भावनाशीलों से संपर्क प्रारम्भ कर दिया गया है। विद्या ऋण चुकाने के लिए दिया गया प्रोत्साहन 80 प्रतिशत सफल हो रहा है। लगता है उल्लेखनीय उपलब्धि इसी वर्ष में हस्तगत हो जायेगी।

