देव संस्कृति विश्वविद्यालय में शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर सातवाँ दीक्षांत समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न
अखिल विश्व गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के अवतरण शताब्दी वर्ष तथा अखंड दीपक के प्राकट्य के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर, राजा दक्ष की नगरी हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आज सातवाँ दीक्षांत समारोह अत्यंत गरिमामय, प्रेरणादायी एवं भावविभोर वातावरण में सम्पन्न हुआ।
यह दीक्षांत समारोह शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के मार्गदर्शन एवं अध्यक्षता में आयोजित किया गया।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि वंदनीया माताजी एवं अखंड दीपक के शताब्दी वर्ष में उपाधि प्राप्त करना जहाँ गौरव का विषय है, वहीं गुरुदेव द्वारा प्रदत्त जीवन-मूल्यों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने हेतु स्वयं प्रकाश-पुंज बनने का दायित्व भी दीक्षांतार्थियों पर है।
इस अवसर पर लॉर्ड कृष रावल, सदस्य, हाउस ऑफ़ कॉमन्स, यूनाइटेड किंगडम, ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की ओर से संदेश प्रेषित किया।
समारोह के मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर जूना अखाड़ा स्वामी अवधेशानंद गिरी जी ने स्नातकों को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त करना अपने आप में सौभाग्य का विषय है।
दीक्षांत समारोह में देश-विदेश से पधारे अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से श्री विजय धसमाना, अध्यक्ष, स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय; श्री दीवाकर सिंह, चांसलर, सरस्वती पटेल विश्वविद्यालय; श्री अजय तिवारी, चांसलर, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय; प्रो. शोभित माथुर, कुलपति, ऋषिहुड विश्वविद्यालय; प्रो. सतीश कुमार, कुलपति, सूरजमल विश्वविद्यालय; प्रो. दिनेश शास्त्री, पूर्व कुलपति, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इसके अतिरिक्त उद्योग एवं अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र से श्री फिरोज़ मिस्त्री एवं श्री ज़हान मिस्त्री (शापूरजी पल्लोंजी समूह) तथा श्री कार्तिकेय जोहरी, भारत के राजदूत (पोलैंड) की गरिमामयी सहभागिता ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।
शताब्दी वर्ष के इस विशेष अवसर पर आयोजित दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को पीएच.डी., परास्नातक एवं स्नातक की उपाधियाँ प्रदान की गईं।
