शांतिकुंज में नवरात्रि साधना के साथ जन्मशताब्दी के संकल्पों का संदेश
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में शारदीय नवरात्रि विशेष साधना शिविर के पंचम दिवस पर जन्मशताब्दी दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने देश-विदेश से आए हजारों गायत्री परिजनों को संबोधित किया। उन्होंने साधना, आत्मपरिष्कार और सेवा के माध्यम से व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि जन्मशताब्दी वर्ष गुरुदेव एवं माताजी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने और जीवन में उतारने का संकल्प है।
डॉ. पंड्या जी ने श्रद्धा, समर्पण और विश्वास को ईश्वर के निकट पहुँचने का मार्ग बताते हुए आत्मसमीक्षा, आत्मसुधार और आत्मनिर्माण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवरात्रि साधना अपने भीतर के परिष्कार, मन के संयम और सद्गुणों की वृद्धि का अवसर है। व्यक्ति को अपनी आत्मा से जुड़ने, अर्जुन की तरह लक्ष्य पर केंद्रित रहने और अपने भीतर की बुराइयों को त्यागकर गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने प्रेरित किया कि बाहरी समस्याओं का समाधान भीतर ही खोजने का प्रयास करना चाहिए। साधना के दौरान मन को गुरुदेव एवं माताजी के प्रति समर्पित रखते हुए उनके अलावा कहीं और ध्यान न भटकने दें और साधना पथ पर निरंतर अग्रसर रहें। गायत्री मंत्र, आत्मपरिष्कार और सद्गुणों के विकास से स्वयं का निर्माण करते हुए गुरुदेव-माताजी के आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्चे कल्याण का मार्ग है।
