स्वामी विवेकानन्द
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स्वामी विवेकानन्द हैदराबाद की यात्रा कर रहे थे। एक व्यक्ति ने आकर स्वामी जी को प्रणाम किया और विनीत याचना की- ‘‘स्वामी जी मेरे बच्चे को तीव्र ज्वर है, यदि उसके शिर पर हाथ रख दें तो उसका ज्वर शाँत हो जावें। मैंने सुना है कि तेजस्वी महात्माओं द्वारा ऐसा करने से रोग तक दूर हो सकते हैं।”
स्वामी जी से लोगों ने कहा- ‘‘वह बड़ा चमत्कारी व्यक्ति है सब के मन को बात तक जान लेता है।”
स्वामी जी ने कहा- ‘‘यदि तुम अपना चमत्कार दिखाओ तो मैं भी तुम्हारे बच्चे कि सिर पर हाथ रख सकता हूँ?” उस व्यक्ति ने यह शर्त स्वीकार करली। स्वामी जी के आशीर्वाद से बच्चा ठीक हो गया। तब उसका नंबर आया। स्वामी जी ने गुलाब के फूल, सेब और कुछ वस्तुयें माँगी लोग यह देखकर आश्चर्यचकित रह गये कि जोड़ा गुलाब का फूल जिसमें ओंस के कण विद्यमान् थे, सेब आदि सभी वस्तुयें एक कंबल से निकाल दीं।
वह व्यक्ति संस्कृत न जानता था स्वामी जी ने संस्कृत का एक वाक्य मन में लिया। जब उससे पूछा गया तो उसने कहा- ‘‘अपनी जेब में पड़ा कागज निकालिये।” ऐसा करने पर लोग आश्चर्यचकित रह गये क्योंकि वह संस्कृत का श्लोक उसी कागज पर अंकित हो गया था।

