ज्योति कलश यात्रा का भव्य एवं अभूतपूर्व शुभारंभ, वैश्विक एकता और सांस्कृतिक चेतना का सजीव उत्सव
परम वंदनीय माताजी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी समारोह के क्रम में ज्योति कलश यात्रा का शुभारंभ एक ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय क्षण के रूप में हुआ। यह यात्रा पूज्य गुरुदेव की विचार-ज्योति को विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाने वाले संकल्प का सजीव प्रतीक बनकर सामने आई।
भारत एवं विदेशों सहित विश्व के 14 से अधिक जोनों से ज्योति कलश लेकर गायत्री परिवार के परिजन श्रद्धा और अनुशासन के साथ हरिद्वार पहुँचे। देश-विदेश के विभिन्न प्रांतों से आए लाखों परिजनों की सहभागिता ने इस यात्रा को वैश्विक एकता और सामूहिक चेतना का विराट स्वरूप प्रदान किया।
इस पावन अवसर पर आदरणीया श्रद्धेया जीजी, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शेफाली जीजी ने स्वयं ज्योति कलश धारण कर बहनों का आत्मीय स्वागत किया। उपस्थित जनसमूह पर पुष्पवर्षा करते हुए उन्होंने ज्योति कलश यात्रा के शुभारंभ का विधिवत उद्घोष किया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण भाव-विभोर हो उठा।
ज्योति कलश यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों से आए परिजनों ने अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, लोकवेशों एवं पारंपरिक नृत्यों के माध्यम से यात्रा को भव्यता प्रदान की। विविध संस्कृतियों का यह संगम ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को सजीव रूप में अभिव्यक्त करता प्रतीत हुआ।
सम्पूर्ण वैरागी द्वीप श्रद्धा, उल्लास और युग-परिवर्तन के संकल्प से ओत-प्रोत रहा, जहाँ यह अनुभूति प्रबल होती गई कि ज्योति कलश यात्रा आने वाले समय में नवचेतना, नवसंस्कार और नवनिर्माण का आधार बनेगी।

