पर्यावरण एवं वातावरण शुद्धि का विराट संकल्प, शताब्दी समारोह में प्रकृति-संरक्षण का सामूहिक उद्घोष
वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखण्ड दीपक शताब्दी समारोह के क्रम में आज पर्यावरण एवं वातावरण शुद्धि को समर्पित एक प्रेरक संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन पूज्य गुरुदेव की उस दृष्टि को साकार करने का सशक्त प्रयास रहा, जिसमें प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन को मानव कर्तव्य के रूप में स्थापित किया गया है।
इस अवसर पर शताब्दी समारोह 2026 के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि शताब्दी समारोह केवल स्मरण का पर्व नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए उत्तरदायित्वपूर्ण संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को युग-निर्माण के मूल आधारों में से एक बताते हुए सभी को सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि आचार्य जी, हरिद्वार एवं मुंबई की प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के अध्यक्ष पूज्य स्वामी विश्वेश्वरानंद जी, पतंजलि योगपीठ के संस्थापक योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी, उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री की रणनीतिक सलाहकार समिति के सदस्य श्री मनु गौड़ जी, ‘रिवरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से विख्यात श्री रमण कांत जी तथा भारतीय सरकारी अधिकारी (VAME) श्री भूपेन्द्र कंथोला जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के समापन पर सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा तरु-पूजन किया गया। इस अवसर पर यह संकल्प लिया गया कि देश के विभिन्न जोनों से जुड़े गायत्री परिवार के परिजनों द्वारा 2400 से अधिक वृक्षों का रोपण किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संतुलन, जलवायु शुद्धि और भावी पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।
सम्पूर्ण वातावरण प्रकृति, प्राण और पुरुषार्थ के समन्वय से ओत-प्रोत रहा, जहाँ शताब्दी समारोह का यह संकल्प मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का सशक्त संदेश बनकर उभरा।
