विधि से विचार तक—शताब्दी समारोह के मंच से युग-निर्माण का भावुक आह्वान
|| वैरागी द्वीप, हरिद्वार | शताब्दी समारोह 2026 ||
शताब्दी समारोह 2026 के पाँच दिवसीय विराट आयोजन के समापन अवसर पर वैरागी कैंप स्थित मुख्य मंच भाव, विचार और संकल्प की त्रिवेणी बन गया। यह मंच किसी आयोजन का अंत नहीं, बल्कि परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी के विचारों को जन–जन तक पहुँचाने की जिम्मेदारी का उद्घोष था।
अपने अत्यंत भावपूर्ण संबोधन में जन्मशताब्दी के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि, आज ऐसा प्रतीत होता है मानो परम पूज्य गुरुदेव और परम वंदनीया माताजी हम सभी पर प्रेम और सद्विचारों की वर्षा कर रहे हों। यह हमारा परम सौभाग्य है कि हम इस पावन धरती पर उपस्थित होकर उस दिव्य अनुकंपा को अनुभव कर पा रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि शताब्दी समारोह का यह अवसर केवल सुनने या देखने का नहीं, बल्कि अपने अंतःकरण को गड्ढे की तरह रिक्त कर लेने का है, ताकि गुरुदेव–माताजी के विचार, उनका प्रेम और उनका संकल्प उसमें पूरी तरह भर सके।
डॉ. पंड्या जी ने भावुक स्वर में यह भी कहा कि पूज्य गुरुदेव की तपस्या का उत्तरदायित्व आज प्रत्येक गायत्री परिजन के कंधों पर है—विचारों को जीने और उन्हें फैलाने का उत्तरदायित्व।
