मातृ-स्मरण शोभा यात्रा एवं भावभीना समापन- आँखों में नमी, हृदय में अनंत संकल्प
पाँच दिनों तक साधना, सेवा और राष्ट्रचेतना से अनुप्राणित शताब्दी समारोह 2026 का समापन मातृ-स्मरण शोभा यात्रा के साथ हुआ—एक ऐसी यात्रा, जहाँ शब्द मौन हो गए और अनुभूतियाँ स्वयं बोल उठीं। यह यात्रा परम वंदनीया माताजी के त्याग, करुणा और मौन तप को नमन करती हुई आगे बढ़ी।
आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शैफाली जिजी के सान्निध्य में निकली इस शोभा यात्रा में प्रत्येक कदम श्रद्धा से भरा था। हाथों में ध्वज, हृदय में पूज्य गुरुदेव- वंदनीय माताजी की स्मृति और नेत्रों में भावों की नमी, गायत्री परिजनों की यह मौन पदयात्रा स्वयं में एक जीवंत प्रार्थना बन गई।
जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ती गई, ऐसा प्रतीत होता रहा मानो संपूर्ण वातावरण यह कह रहा हो, “यह अंत नहीं… यह उत्तराधिकार है।”
शताब्दी समारोह का यह भावपूर्ण समापन वास्तव में एक नई शुरुआत का घोष बन गया—जहाँ परम पूज्य गुरुदेव और परम वंदनीया माताजी की साधना अब केवल स्मरण की विषयवस्तु नहीं रही, बल्कि जीवन का मार्ग और कर्म का आधार बन चुकी है।
कार्यक्रम औपचारिक रूप से सम्पन्न हुआ, पर युग-यात्रा अब आरंभ हुई है।
