शांतिकुंज में शोभा यात्रा का आगमन- जहाँ यात्रा ने पाया विश्राम, और संकल्प ने नई दिशा
|| हरिद्वार | शताब्दी समारोह 2026 ||
मातृ-स्मरण शोभा यात्रा जब वैरागी कैंप से प्रस्थान कर शांतिकुंज, हरिद्वार पहुँची, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो पाँच दिनों की साधना, श्रद्धा और संकल्प की यात्रा अपने मूल स्रोत में समाहित हो रही हो। यह आगमन केवल एक स्थान तक पहुँचने का क्षण नहीं था, बल्कि पूज्य गुरुदेव– वंदनीय माताजी की तपस्थली में भावों के समर्पण का दृश्य था।
शोभा यात्रा का आत्मिक और श्रद्धामय स्वागत शताब्दी समारोह के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शैफाली जिजी द्वारा किया गया। शांतिकुंज के प्रांगण में जैसे ही यात्रा पहुँची, संपूर्ण वातावरण मौन श्रद्धा, कृतज्ञता और भावविभोर अनुभूति से भर उठा।
यहाँ यात्रा ने विश्राम पाया, किंतु साथ ही युग-निर्माण के संकल्पों ने नई दिशा ग्रहण की। पूज्य गुरुदेव की तपस्थली में पहुँची यह शोभा यात्रा मानो यह संदेश दे रही थी कि यात्रा समाप्त नहीं हुई है— वह अब जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रवाहित होने जा रही है।
शांतिकुंज में यह आगमन शताब्दी समारोह 2026 का भावपूर्ण, गरिमामयी और सार्थक समापन बन गया—जहाँ स्मृति ने साधना का रूप लिया और संकल्प ने भविष्य की ओर कदम बढ़ाया।
