देव संस्कृति विश्वविद्यालय में “साइबर शिक्षा” – Cyber Awareness & Digital Literacy Program कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को किया गया डिजिटल रूप से जागरूक एवं सशक्त
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में परम वंदनीया माताजी के जन्म शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर परिसर में निवासरत महिलाओं हेतु “साइबर शिक्षा” – Cyber Security Awareness & Digital Literacy Program का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को डिजिटल युग में सुरक्षित, जागरूक एवं आत्मनिर्भर बनाना तथा उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों के प्रति सजग करना रहा।
इस कार्यक्रम का आयोजन वंदनीया माताजी इंटरजेनरेशनल सेंटर (VMIC), कंप्यूटर विज्ञान विभाग एवं सृजन शिल्पी (Social Outreach Club) – देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब के संयुक्त तत्वावधान में, आदरणीय प्रतिकुलपति महोदय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय परिसर में निवासरत महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता किया । कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न रोचक एवं सहभागितापूर्ण गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिनमें इंटरैक्टिव संवाद, रीयल लाइफ साइबर फ्रॉड केस , “पहचानिए साइबर खतरे” गतिविधि, QR स्कैम से बचाव एवं WhatsApp प्राइवेसी सेटिंग्स पर लाइव डेमो प्रमुख रहे। साथ ही, साइबर सुरक्षा विषय पर आधारित नुक्कड़ नाटक तथा साइबर थीम पर आधारित Dumb Charades जैसी गतिविधियों ने प्रतिभागियों को मनोरंजन के साथ-साथ व्यावहारिक सीख प्रदान की।
इन सभी गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का प्रभावी प्रयास किया गया। साथ ही सभी प्रतिभागियों द्वारा यह संकल्प लिया गया कि वे अपने डिजिटल जीवन में डिजिटल वेलबीइंग, सुरक्षित डिजिटल लाइफस्टाइल एवं साइबर सुरक्षा का पूर्ण ध्यान रखेंगी तथा अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगी।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा खुले संवाद के माध्यम से साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा। कार्यक्रम ने यह संदेश सशक्त रूप से प्रस्तुत किया कि डिजिटल सशक्तिकरण तभी सार्थक है, जब उसके साथ जागरूकता और संतुलन भी जुड़ा हो।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर यह प्रेरणादायक संदेश दिया गया कि “डिजिटल रूप से सशक्त नारी ही सुरक्षित, जागरूक और सशक्त समाज की आधारशिला है।” यह कार्यक्रम महिलाओं के लिए केवल एक जागरूकता पहल नहीं, बल्कि सीख, सहभागिता और सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायी अनुभव सिद्ध हुआ।
