• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • आत्म-विश्वास और सफलता
    • वैराग्य भावना से मनोविकारों का शमन
    • Quotation
    • ईश्वर है या नहीं?
    • भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य
    • मन को अस्वस्थ न रहने दिया जाय :-
    • साधनों की पवित्रता भी आवश्यक है।
    • इंद्रियों का सदुपयोग करना सीखें
    • मानवता का विशिष्ट लक्षण - सहानुभूति
    • बुद्धि-बल भी तो बढ़ाइए-
    • इन्द्रासन प्राप्त हुआ
    • उतना बोलिए जितना आवश्यक हो
    • स्वाध्याय सन्दोह :-
    • प्रयत्न करने पर भी सुख क्यों नहीं मिलता?
    • स्वर्ग आपके घर में हैं।
    • इच्छाएँ और उनका सदुपयोग
    • विशुद्ध हृदय
    • मधु-संचय
    • मधु-संचय (Kavita)
    • जन-जन में उत्साह (Kavita)
    • झुक जाओ (Kavita)
    • तू बहुत सो चुका (Kavita)
    • मन में बल हो तो (Kavita)
    • समय नहीं (Kavita)
    • असत्य और उसके दुष्परिणाम
    • Quotation
    • काम करने से जी न चुराइये
    • चिन्ताओं से छुटकारे का मार्ग
    • क्रोध-एक घातक मनोविकार
    • दान क्यों दें? किसे दें?
    • स्वास्थ्य-निर्माण में मालिश का प्रयोग
    • हमारी चरित्र-भ्रष्टता कैसे मिटे?
    • बच्चों को डराया न करें
    • हमारे प्रतिनिधि और उत्तराधिकारी
    • ज्योतिर्मय दिव्य-शक्ति का अवतरण
    • निर्माण यज्ञ!
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login


Back to Books

Magazine - Year 1965 - Version 2

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT SCAN EPUB KINDLE


आत्म-विश्वास और सफलता

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last
ईश्वर ने हमें अपनी सर्वोत्कृष्ट कृति के रूप से विनिर्मित किया है। वह अविश्वस्त एवं अप्रमाणिक नहीं हो सकता, इसलिए हमें अपने ऊपर विश्वास करना चाहिये। ईश्वर हमारे भीतर निवास करता है। जहाँ ईश्वर निवास करे, वहाँ दुर्बलता की बात क्यों सोची जानी चाहिए? जब छोटा-सा शस्त्र या पुलिस कर्मचारी साथ होता है, तो विश्वासपूर्वक निश्चिन्त रह सकना सम्भव हो जाता है, फिर जब कि असंख्य वज्रों से बढ़ कर शस्त्र और असंख्य सेनापतियों से भी अधिक सामर्थ्यवान् ईश्वर हमारे साथ है, तब किसी से डरने या आतंकित होने की आवश्यकता ही क्यों होनी चाहिए।

जो अपने ऊपर भरोसा करता है, उसी का दूसरे लोग भी भरोसा करते हैं। जो अपनी सहायता आप करता है, उसी की ईश्वर भी सहायता करता है। जिसने अपने हाथ पैर चलाना बन्द कर दिया, उसका डूबना निश्चित है। हो सकता है कि किसी निष्ठावान को भी कभी असफल होना पड़ा है पर संसार में आज तक जितने सफल हुए हैं, उनमें से प्रत्येक को आत्म विश्वासी बनकर ही आगे बढ़ना पड़ा है। हो सकता है किसी किसान की फसल मारी जाय, पर जिसे धान काटने का सौभाग्य मिला है, उनमें से प्रत्येक को बोने और सींचने की कठोर प्रक्रिया को अपनाना ही पड़ता है। आत्म-विश्वास शक्ति का स्रोत है। उसी के सहारे किसी के लिए आगे बढ़ना सम्भव हो सकता है। भाग्य का निर्माण ईश्वर नहीं, आत्म-विश्वास करता है। जो निष्ठापूर्वक पुरुषार्थ में संलग्न है और हार-जीत की चिन्ता न करते हुए आगे ही बढ़ता जाता है, उस आत्म-विश्वासी के लिए पर्वतों को भी रास्ता देना पड़ता है।

- ईश्वरचन्द्र विद्यासागर

2 Last


Other Version of this book



Version 2
Type: TEXT
Language: HINDI
...

Version 1
Type: SCAN
Language: HINDI
...


Releted Books


Articles of Books

  • आत्म-विश्वास और सफलता
  • वैराग्य भावना से मनोविकारों का शमन
  • Quotation
  • ईश्वर है या नहीं?
  • भारतीय संस्कृति के आधारभूत तथ्य
  • मन को अस्वस्थ न रहने दिया जाय :-
  • साधनों की पवित्रता भी आवश्यक है।
  • इंद्रियों का सदुपयोग करना सीखें
  • मानवता का विशिष्ट लक्षण - सहानुभूति
  • बुद्धि-बल भी तो बढ़ाइए-
  • इन्द्रासन प्राप्त हुआ
  • उतना बोलिए जितना आवश्यक हो
  • स्वाध्याय सन्दोह :-
  • प्रयत्न करने पर भी सुख क्यों नहीं मिलता?
  • स्वर्ग आपके घर में हैं।
  • इच्छाएँ और उनका सदुपयोग
  • विशुद्ध हृदय
  • मधु-संचय
  • मधु-संचय (Kavita)
  • जन-जन में उत्साह (Kavita)
  • झुक जाओ (Kavita)
  • तू बहुत सो चुका (Kavita)
  • मन में बल हो तो (Kavita)
  • समय नहीं (Kavita)
  • असत्य और उसके दुष्परिणाम
  • Quotation
  • काम करने से जी न चुराइये
  • चिन्ताओं से छुटकारे का मार्ग
  • क्रोध-एक घातक मनोविकार
  • दान क्यों दें? किसे दें?
  • स्वास्थ्य-निर्माण में मालिश का प्रयोग
  • हमारी चरित्र-भ्रष्टता कैसे मिटे?
  • बच्चों को डराया न करें
  • हमारे प्रतिनिधि और उत्तराधिकारी
  • ज्योतिर्मय दिव्य-शक्ति का अवतरण
  • निर्माण यज्ञ!
Shantikunj, Haridwar

About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique centre and fountain-head of the global Yug Nirman Yojna—a movement for moral and spiritual regeneration inspired by India’s timeless heritage.

Discover Shantikunj
Discover

Mission

  • Home
  • News & Activities
  • Join Us
  • Contact
Knowledge

Resources

  • Literature
  • Videos & More
  • Audio
  • Quotes & Thoughts
We value your thoughts

Write to Us

Share your suggestions, feedback, questions, or experiences with us.

Write to us

Copyright © 2026 SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved.

Designed by IT Cell Shantikunj