Quotation
अभागा है वह मनुष्य या राष्ट्र जो भागवत् मुहूर्त के आने पर सोया हुआ रहे या उसके उपयोग के लिए तैयार न हो, क्योंकि उसके स्वागत के लिए दीया सँजोकर नहीं रखा गया और उसकी पुकार की ओर से कान बंद कर लिये गये है पर कहीं अधिक अभागे है वे जो सशक्त और तैयार होते हुए भी, उस शक्ति का अपव्यय करते हैं और उस मुहूर्त का दुरुपयोग करते हैं, उनके भाग्य में होती है पूरी न हो सकने वाली क्षति या एक महान विनाश।-- रवीन्द्र
*समाप्त*

