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Magazine - Year 1993 - Version 2

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अभागा है वह मनुष्य या राष्ट्र जो भागवत् मुहूर्त के आने पर सोया हुआ रहे या उसके उपयोग के लिए तैयार न हो, क्योंकि उसके स्वागत के लिए दीया सँजोकर नहीं रखा गया और उसकी पुकार की ओर से कान बंद कर लिये गये है पर कहीं अधिक अभागे है वे जो सशक्त और तैयार होते हुए भी, उस शक्ति का अपव्यय करते हैं और उस मुहूर्त का दुरुपयोग करते हैं, उनके भाग्य में होती है पूरी न हो सकने वाली क्षति या एक महान विनाश।-- रवीन्द्र

*समाप्त*

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