ज्योति कलशों का दिव्य भावों के साथ स्वागत
परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की चेतना का प्रत्यक्ष स्वरूप अखंड दीप हैं। उसकी दिव्य ज्योति को श्रद्धेयद्वय के मार्गदर्शन में जन-जन तक पहुँचाकर ज्योति कलशो का जन्मशताब्दी महोत्सव हेतु शांतिकुंज में आगमन हुआ। मध्यप्रदेश, राजस्थान, पूर्वोत्तर भारत – बंगाल एवं नेपाल से आए कुल 15 ज्योति कलशों का शांतिकुंज में श्रद्धा-संवेदनाओं के साथ स्वागत हुआ।
जन्मशताब्दी महायज्ञीय संकल्पों को गति देते हुए जन्मशताब्दी समारोह के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया शेफाली दीदी ने प्रखर प्रज्ञा–सजल श्रद्धा समाधि स्थल पर पुष्पार्चन कर कलशों का पूजन किया। ज्योति कलशों के साथ पधारे परिजनों का आत्मीय अभिनंदन तिलक एवं स्नेहिल भावों के साथ संपन्न हुआ।
गायत्री मंत्र की गूँज, शंखनाद की पावन ध्वनि एवं प्रज्ञा बैंड की सुरलहरियों के बीच कलशधारी परिजनों की शोभायात्रा शांतिकुंज परिसर में प्रवाहित हुई। इसके पश्चात गायत्री मंदिर–साधना कक्ष में प्रार्थना एवं आरती द्वारा भावपूर्ण समापन हुआ।
देश-विदेश से लौटती अखंड दीप की यह दिव्य ज्योति जन्मशताब्दी महोत्सव हेतु वातावरण को चेतना, संकल्प और साधना से आलोकित कर रही है।
