“स्क्रीन से संतुलन तक: बच्चों के समग्र विकास हेतु प्रेरणादायक पहल”
“नन्हें बच्चों के लिए डिजिटल वेलबीइंग: स्वस्थ, सुरक्षित और सम्पूर्ण बचपन” – जागरूकता एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का वंदनीया माताजी इंटरनेशनल सेंटर (VMIC), कंप्यूटर विज्ञान विभाग एवं ‘दिशा’ (Psychological, Spiritual & Career Counselling Club) – देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब द्वारा संयुक्त आयोजन
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए “बच्चों के लिए डिजिटल वेलबीइंग: स्वस्थ, सुरक्षित और सम्पूर्ण बचपन” विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वंदनीया माताजी इंटरनेशनल सेंटर (VMIC), कंप्यूटर विज्ञान विभाग एवं ‘दिशा’ (Psychological, Spiritual & Career Counselling Club) – देव संस्कृति स्टूडेंट्स क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन आदरणीय प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या जी के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें बच्चों एवं अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल माध्यमों के संतुलित एवं सुरक्षित उपयोग, स्वस्थ जीवनशैली तथा सकारात्मक दिनचर्या के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत ऊर्जा और उत्साह से भरे इंटरैक्टिव सत्रों के साथ हुई, जिसने बच्चों को सीखने के साथ-साथ आनंद का अनुभव कराया।
भावनाओं की पहचान:
बच्चों ने अलग-अलग इमोजी देखकर चेहरे के भाव बनाए, जिससे उन्होंने अपनी भावनाओं को समझना और व्यक्त करना सीखा।
कहानी – “चिंटू और मैजिक मोबाइल”:
एक रोचक कहानी के माध्यम से बच्चों को मोबाइल के सही उपयोग और उसके प्रभावों के बारे में सरल और प्रभावी ढंग से समझाया गया।
बच्चों को मोबाइल के अधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभाव जैसे आंखों और गर्दन पर असर के बारे में जागरूक किया गया।
एक प्रेरणादायक वीडियो के माध्यम से बच्चों ने मोबाइल की लत के परिणामों को समझा और उससे बचने की प्रेरणा प्राप्त की।बच्चों को यह समझाया गया कि लगातार स्क्रीन उपयोग से उनकी मानसिक ऊर्जा कैसे प्रभावित होती है।
गुरुदेव एवं स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरों को पहचानने की गतिविधि के माध्यम से बच्चों में ज्ञान और प्रेरणा दोनों का संचार हुआ।बच्चों ने अपनी पसंदीदा चीज़ों का चित्र बनाकर अपनी रचनात्मकता को व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों ने संकल्प लिया कि वे डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग करेंगे और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएंगे।कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ कि “संतुलित डिजिटल जीवन ही स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।”
