धर्म, उद्योग एवं वैश्विक नेतृत्व ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक भविष्य पर किया मंथन
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा आइकॉन आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने इस अंतरराष्ट्रीय पैनल चर्चा में विश्व के प्रतिष्ठित धार्मिक, औद्योगिक एवं प्रौद्योगिकी नेतृत्वकर्ताओं के साथ सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन Globethics के कार्यकारी निदेशक फादी दाऊ ने किया।
इस अवसर पर AI and Multimedia Authenticity Standards Collaboration की अध्यक्ष एलेसांद्रा साला, Alwaleed Philanthropies की महासचिव एवं न्यासी मंडल की सदस्य एच.आर.एच. प्रिंसेस लामिया बिन्त माजिद सऊद अल-सऊद, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी, Markkula Center for Applied Ethics, Santa Clara University के ब्रायन पैट्रिक ग्रीन तथा Universidad Politécnica de Madrid की शोधकर्ता मीम अराफात मनाब ने अपने विचार प्रस्तुत किए। पैनल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास में मानवीय गरिमा, सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, समावेशिता तथा विभिन्न आस्थाओं एवं संस्कृतियों की नैतिक शिक्षाओं की भूमिका पर गहन चर्चा हुई।
सत्र में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य केवल तकनीकी उत्कृष्टता से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व, वैश्विक सहयोग तथा मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से सुनिश्चित होगा। विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने इस दिशा में अंतरधार्मिक संवाद, उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों एवं नीति-निर्माताओं के समन्वित प्रयासों को समय की आवश्यकता बताया। आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी की सहभागिता ने भारतीय आध्यात्मिक चिंतन एवं मानवीय मूल्यों को इस वैश्विक विमर्श में प्रभावी रूप से स्थापित किया।
