गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का प्रेरणाप्रद उद्बोधन
हरिद्वार, 28 जुलाई 2026। गुरु पूर्णिमा पर्व 2026 की पूर्व संध्या पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज के मुख्य सभागार में आयोजित विशेष प्रेरणा सत्र में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने उपस्थित हजारों श्रद्धालु परिजनों का मार्गदर्शन किया। अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण उद्बोधन में उन्होंने गुरु-शिष्य संबंध की गहन आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपने जीवन-लक्ष्य का पुनः स्मरण कराने और गुरुसत्ता के प्रति पूर्ण समर्पण का संकल्प लेने का पावन अवसर है।
अपने उद्बोधन में आदरणीय डॉ. पंड्या जी ने एक प्रेरक दृष्टांत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक राज्य के राजा ने अपने उत्तराधिकारी के चयन हेतु घोषणा की कि जो व्यक्ति सूर्यास्त से पूर्व सिंहासन तक पहुँच जाएगा, वही राज्य का अगला राजा बनेगा। अगले दिन सिंहासन तक जाने वाले मार्ग पर लाल कालीन बिछा दी गई तथा मार्ग के दोनों ओर आकर्षक बाजार, मनोरंजन और विविध प्रकार के प्रलोभनों की व्यवस्था कर दी गई। अनेक लोग राजा बनने की आकांक्षा लेकर घरों से निकले, किन्तु मार्ग में सजे आकर्षणों में ही उलझकर अपने वास्तविक लक्ष्य को भूल बैठे।
इस दृष्टांत को वर्तमान जीवन से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने हमारे घर से अपने कक्ष तक कालीन बिछा दी और दोनों ओर दुकानें लग गईं। कोई यहाँ उलझ गया, कोई वहाँ उलझ गया और भूल ही गया कि यात्रा प्रखर प्रज्ञा की थी, गुरुदेव के कक्ष की थी, उनके हृदय तक पहुँचने की थी।
गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें यह याद दिलाने के लिए आता है कि न इधर देखना है, न उधर देखना है। यह मजमा जिन्होंने सजाया है, उन्हीं ने बुलाया है और वे हमारी प्रतीक्षा कर रहे हैं। वे यह देखना चाहते हैं कि सूरज ढलने से पहले वह कौन है जो बिना इधर देखे, बिना उधर देखे सीधे हमारे पास आता है। जो आता है, वह उनका हो जाता है।
दोस्तों, आज का दिन हमें यह याद दिलाने के लिए आया है कि जिनके होने के लिए गुरु पूर्णिमा आई है, स्वयं को उन्हीं के लिए समर्पित करें।
आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी के भावपूर्ण एवं ओजस्वी उद्बोधन से सभागार में उपस्थित हजारों श्रद्धालु परिजन भावविभोर हो उठे। संपूर्ण वातावरण गुरु-भक्ति, श्रद्धा और आत्मसमर्पण की दिव्य अनुभूतियों से ओतप्रोत हो गया। कार्यक्रम के दौरान मंचासीन वरिष्ठ कार्यकर्ता भी इस प्रेरणादायी उद्बोधन के साक्षी बने।
शांतिकुंज से प्रत्यक्ष प्रसारण के माध्यम से भारत सहित विश्व के अनेक देशों में जुड़े श्रद्धालु परिजनों ने भी ऑनलाइन इस विशिष्ट मार्गदर्शन का लाभ प्राप्त किया तथा गुरु महिमा के इन प्रेरक संदेशों को श्रद्धापूर्वक आत्मसात किया।
