नशामुक्ति पर स्वरचित कविता समर्पित करता हूं :
आओ लें संकप सभी मिल, नशा नहीं अपनाएंगे, जीवन उज्जवल करेंगे अपना, इस विष को दूर भगाएंगे।।
नशा नाश की जड़ है पक्का, सोचो और विचार करो, नशेबाज का घर देखो इस विषम बेल को दूर करो।।
बच्चे भूखे बिलख रहे हैं, घर वाले लाचार हैं, पाई पाई को तरस रहे जो पड़े हुए बीमार हैं।
ऐसे में भी नशेबाज को तनिक शर्म नहीं आती है, कोई जीए कोई मरे पर उसको दारू भाती है।।
ऐसे नारकीय जीवन से तो मर जाना बेहतर है, नाली में जो पड़ा हुवा कुत्ते से भी जो बदतर है।।
(इसीलिए परमपूज्य गुरुदेव का संदेश है)।
हम बदलेंगे युग बदलेगा, यही बताने आएं हैं, मां गायत्री के बेटे संदेश सुनाने आएं हैं।।
आज सभी संकल्पित हों जीवन का उत्थान करें, नशा नाश की जड़ है यह समझाने को प्रस्थान करे।।
जन आन्दोलन खड़ा करेंगे धरती स्वर्ग बनाएंगे, नशा नाश की जड़ है यह जन जन को हम समझाएंगे।।
हाथ जोड़ कर विनती है यह दौसा से घनश्याम की, नशा मुक्त कर दो धरती को, यह भक्ति स्वयं भगवान की।।
सादर।
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