वैरागी द्वीप में नौ-कुंडीय यज्ञ का शुभारंभ, जन्मशताब्दी समारोह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा से हुआ अनुप्राणित
सनातन संस्कृति में परम पवित्र माने जाने वाले मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा का शुभ दिवस अखिल विश्व गायत्री परिवार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। परम वंदनीया माताजी के जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में, वसुधा वंदन (तीर्थ रज पूजन) जैसे ऐतिहासिक आयोजन के अगले ही दिन वैरागी द्वीप पर एक और भव्य एवं दिव्य अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ हुआ।
प्रातःकालीन वेला में भगवान सविता (सूर्य) की स्वर्णिम, जीवनदायिनी किरणों के साथ वैरागी द्वीप स्थित नौ-कुंडीय यज्ञशाला में नियमित यज्ञों की मंगल शुरुआत की गई। यह शुभारंभ जन्मशताब्दी समारोह स्थल में आध्यात्मिक ऊर्जा के संवर्धन का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण रहा।
वैरागी द्वीप की पवित्र भूमि पर स्थापित 51 तीर्थों के दिव्य जल एवं रज का वंदन कर, प्रथम दिवस के इस पावन यज्ञ के मुख्य यजमान बने—
देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एवं आदरणीया श्रीमती शेफाली पंड्या जी।
वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य, आदरणीय द्वय ने 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान करते हुए गायत्री महामंत्र से सिक्त आहुतियाँ नौ यज्ञ-कुंडों में समर्पित कीं। मंत्रोच्चार, धूप-दीप एवं आहुतियों की सुगंध से सम्पूर्ण परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से अनुप्राणित हो उठा।
