छत्तीसगढ़ चार दिवसीय प्रवास के द्वितीय दिन आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी बरौद एवं सिलघाट पहुंचे
छत्तीसगढ़ प्रवास के दूसरे दिन आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी गायत्री विद्यापीठ, बरौद पहुंचे, जहाँ सभी विद्यार्थियों एवं विद्यालय के परिजनों ने उनका भावपूर्ण स्वागत किया। इसके उपरांत उन्होंने गायत्री विद्यापीठ, बरौद के शिलालेख का विधिवत शिलान्यास कर सभी के उज्वल भविष्य की कमाना करते हुए परमपूज्य गुरुदेव के विचारों को सबके समक्ष रखा।
शिलान्यास कार्यक्रम के बाद आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी बेमेतरा जिले के ग्राम भीमौरी, सिलघट पहुँचे, जहाँ आयोजित 108 कुंडी गायत्री महायज्ञ में सजल श्रद्धा प्रखर प्रज्ञा पर पुष्पांजलि कर एवं वेदमाता गायत्री की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर मंच पर पहुंचे जहां उन्होंने उपस्थित परिजनों को संबोधित करते हुए कहा—
“देव संस्कृति के निर्माता, यज्ञ-पिता, गायत्री माता के भावों को आत्मसात कर हम सब परम वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीपक शताब्दी वर्ष के महाअभियान को सफल बनाने हेतु संकल्पबद्ध हों। यह हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ इस दिव्य कार्य में सहभागी बनें।”
उन्होंने सभी परिजनों को संबोधित करते हुए कहा:
“साथियों! यह हमारा परम सौभाग्य है कि हम सबको परम पूज्य गुरुदेव तथा परम वंदनीया माताजी के शिष्य बनकर सेवा का अवसर मिला है।”
समारोह के अंतिम चरण में अवसर पर देव पूजन कार्यक्रम में पधारे सभी प्रमुख परिजनों एवं आयोजक मंडल के सदस्यों का स्मृति-चिह्न भेंटकर उनका सस्नेह सम्मान किया गया।
