यज्ञोपैथी कार्यशाला एवं चिकित्सा शिविर के प्रथम चरण का सफल समापन, प्रतिभागियों ने प्राप्त किए प्रमाण-पत्र एवं आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का आशीर्वाद
देव संस्कृति विश्वविद्यालय में आयोजित यज्ञोपैथी कार्यशाला एवं चिकित्सा शिविर के प्रथम चरण का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए यज्ञोपैथी एवं समग्र स्वास्थ्य पद्धति का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। साथ ही मधुमेह (Diabetes), थायरॉयड, तनाव तथा अन्य जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार का लाभ उठाया।
समापन अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने सभी प्रतिभागियों से भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित यज्ञ, योग एवं समग्र चिकित्सा पद्धतियाँ केवल रोगों के उपचार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य के संतुलित विकास का आधार भी हैं।
इस अवसर पर आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए तथा उनके उज्ज्वल, स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन के लिए शुभकामनाएँ एवं आशीर्वाद दिया।
प्रतिभागियों ने कार्यशाला एवं चिकित्सा शिविर के अनुभवों को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञान एवं अध्यात्म के समन्वय पर आधारित स्वास्थ्य पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। यह कार्यशाला समग्र स्वास्थ्य, प्राकृतिक चिकित्सा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।
