मंड्रेला में गुरुस्मृति का पावन स्पंदन — अखण्ड दीप के दर्शन से भावविभोर हुए डॉ. चिन्मय पंड्या जी
मंड्रेला, झुंझुनू (राजस्थान)।
राजस्थान प्रवास के अगले चरण में अखिल विश्व गायत्री परिवार के प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी का *मंड्रेला स्थित गायत्री शक्तिपीठ में पावन आगमन* हुआ। उन्होंने गायत्री मंदिर में श्रद्धापूर्वक आरती एवं उपासना कर माँ गायत्री का आशीर्वाद प्राप्त किया।
तत्पश्चात् डॉ. पंड्या जी गायत्री परिवार की नींव के प्रमुख स्तंभ एवं मंड्रेला गायत्री शक्तिपीठ के संस्थापक सदस्य स्वर्गीय डॉ. रसिकलाल रावल जी के निवास स्थल पर पहुंचे। *यह वही पावन स्थल है, जहाँ सन् 1960 में परम पूज्य गुरुदेव जी का आगमन हुआ था और उनके कर-कमलों से एक दीप प्रज्वलित किया गया था।*
विगत दशकों से निरंतर प्रज्वलित उस अखण्ड दीप के दर्शन कर डॉ. पंड्या जी भावविभोर हुए। उन्होंने उसी पावन स्थल पर ध्यान-साधना के माध्यम से परम पूज्य गुरुदेव की तपःशक्ति, साधना एवं दिव्य ऊर्जा का आत्मिक अनुभव किया।
यह अवसर श्रद्धा, स्मृति और साधना का ऐसा भावपूर्ण संगम बना, जिसने उपस्थित सभी परिजनों को गुरुदेव के विचारों एवं युग निर्माण के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान की।
