सभी शक्तिपीठें बनें ‘मिनी शांतिकुंज’ : डॉ. चिन्मय पंड्या
हरिद्वार 12 सितंबर ।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित तीन दिवसीय ट्रस्ट मंडल कार्यशाला में उत्तर प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं बिहार के विभिन्न जिलों से आए ट्रस्टियों एवं संगठन से जुड़े परिजनों का मार्गदर्शन करते हुए देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं जनशताब्दी कार्यक्रम के दलनायक आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि अब केवल अकेले शान्तिकुंज से काम नहीं चलेगा, अब इसका थोड़ा थोड़ा भार उठाते हुए प्रत्येक शक्तिपीठ अपने आप में ‘मिनी शांतिकुंज’ बनें, ताकि परमपूज्य गुरुदेव के विचार और युग निर्माण का संदेश जन-जन तक पहुँच सके।
उन्होंने कहा कि हम जितना सोचते और चाहते हैं, गुरुदेव उससे कहीं अधिक बढ़कर देते हैं। आवश्यकता केवल निर्मल, प्रबल और समर्पित भावना की है। उन्होंने जनवरी 26 के शताब्दी समारोह की सफलता का श्रेय आगत कार्यकर्ताओं के समर्पित पुरुषार्थ को देते हुए उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से सेवा, समर्पण एवं संगठन भावना के साथ मिशन के कार्यों को आगे भी गति देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डॉ. पंड्या जी ने विभिन्न प्रांतों से आए ट्रस्टियों एवं कार्यकर्ताओं से आत्मीय भेंट की। उनके स्नेहिल सान्निध्य से कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह और आत्मीयता का भाव दिखाई दिया। कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीय संवाद एवं सामूहिक छायाचित्र का यह अवसर सभी के लिए स्मरणीय रहा।
कार्यशाला की कुछ आत्मीय एवं प्रेरणाप्रद झलकियाँ।
