VICHAR KRANTI ABHIYAN
शताब्दी नगर से पाषाणों का मौन संदेश
अवतारी सत्ता जब धरती पर अवतरित होती है, तब सृष्टि के जड़–चेतन सभी उसके सहयोगी और अनुयायी बनकर अपने सौभाग्य को उससे जोड़ लेते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत दृश्य इन दिनों हरिद्वार के वैरागी द्वीप पर, गायत्री परिवार के युग-सृजन सैनिकों के भागीरथ पुरुषार्थ से आकार ले रहे शताब्दी नगर में देखने को मिल रहा है।
एक ओर, ठिठुरती शीत ऋतु की कठोरतम परीक्षा के बावजूद, हजारों हाथ एक साथ जुटकर परम वंदनीया माता जी एवं अखंड दीप के शताब्दी समारोह के लिए वैरागी द्वीप को सुसज्जित कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ पाषाण भी स्वयं को कलाकारों के कुशल हाथों में समर्पित कर, अनेक अतिमनोहारी आकृतियों में ढलते हुए शोभायमान हो रहे हैं।
ये पाषाण अब केवल जड़ पदार्थ नहीं रह गए हैं; इन्होंने विचार-क्रांति की लाल मशाल का स्वरूप धारण कर...
