• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
×

My Notes


  • TOC
    • सेवा व्रत का आदर्श उपस्थित करने वाली- अवंतिका बाई गोखले
    • निरक्षर से विदुषी कैसे बनी
    • निरक्षर से विदुषी कैसे बनी
    • पति की सेवा
    • समाज- सेवा का व्रत-
    • शिशु पालन गृह की स्थापना-
    • हिंद महिला समाज-
    • प्रत्येक सत्कार्य में सहायता-
    • खादी प्रेम और प्रचार के लिए उद्योग-
    • बंबई कारपोरेशन में सेवा कार्य-
    • राष्ट्रीय आंदोलन में जेल जाना-
    • देशभक्त दंपत्ति-
    • पति की बीमारी कारण कार्यक्रम में परिवर्तन
    • अवंतिका बाई की विशेषताएँ-
  • My Note
  • Books
    • SPIRITUALITY
    • Meditation
    • EMOTIONS
    • AMRITVANI
    • PERSONAL TRANSFORMATION
    • SOCIAL IMPROVEMENT
    • SELF HELP
    • INDIAN CULTURE
    • SCIENCE AND SPIRITUALITY
    • GAYATRI
    • LIFE MANAGEMENT
    • PERSONALITY REFINEMENT
    • UPASANA SADHANA
    • CONSTRUCTING ERA
    • STRESS MANAGEMENT
    • HEALTH AND FITNESS
    • FAMILY RELATIONSHIPS
    • TEEN AND STUDENTS
    • ART OF LIVING
    • INDIAN CULTURE PHILOSOPHY
    • THOUGHT REVOLUTION
    • TRANSFORMING ERA
    • PEACE AND HAPPINESS
    • INNER POTENTIALS
    • STUDENT LIFE
    • SCIENTIFIC SPIRITUALITY
    • HUMAN DIGNITY
    • WILL POWER MIND POWER
    • SCIENCE AND RELIGION
    • WOMEN EMPOWERMENT
  • Akhandjyoti
  • Login


Back to Books

Books - अवन्तिका बाई गोखले

Media: TEXT
Language: HINDI
TEXT


सेवा व्रत का आदर्श उपस्थित करने वाली- अवंतिका बाई गोखले

Listen online

View page note

Please go to your device settings and ensure that the Text-to-Speech engine is configured properly. Download the language data for Hindi or any other languages you prefer for the best experience.
×

Add Note


2 Last
महात्मा गांधी ने सन् १९१५ में अफ्रीका से भारतवर्ष आकर जब यहाँ के सार्वजनिक जीवन में भाग लेना आरंभ किया तो उनको अनुभव हुआ कि इस समय सबसे अधिक आवश्यकता भारतीय किसानों की दुरावस्था का सुधार करने और उनमें जाग्रति उत्पन्न करने की है। यद्यपि उस समय देश में स्वराज्य आंदोलन जोर पकड़ रहा था और लोकमान्य तिलक तथा मिसेज एनीबेसेंट जैसे प्रसिद्ध नेता राजनीतिक जाग्रति बडे़ परिमाण में फैला रहे थे, पर उनके प्रयत्न अधिकांश में बडे़ नगरों में रहने वाले शिक्षित- वर्ग तक ही सीमित थे। गाँवों में जाने का कोई साहस ही नहीं करता था, क्योंकि न तो वहाँ किसी तरह सुविधायें मिल सकती थी और न वहाँ की अज्ञानांधकार में डूबी हुई जनता को उठा सकना ही सहज था।

पर गाँधी जी की कार्य प्रणाली प्रत्येक कार्य को जड़ से आरंभ करने की थी। भारतवर्ष की जड़ गाँवों में ही है। किसानों की संख्या संपूर्ण आबादी का ८० प्रतिशत थी और वे ही लोग समाज के 'अन्नदाता' थे। पर अशिक्षा, अज्ञान तथा विदेशी शासन ने उनको लुंज- पुंज बना रखा था। इस बात को समझकर गाँधी जी ने सबसे पहलेखेडा़ और चंपारन के 'किसान- सत्याग्रह' जैसे आंदोलन ही आरंभ किये।

चंपारन में कुछ अंग्रेज नील की खेती कराने का कार्य करते थे। वे बडे़ स्वार्थी और अहंकारी थे और अपने सम्मुख किसी का कुछ भी महत्व समझते ही न थे। देहाती किसान तो उनकी निगाह में भेड़- बकरियों की तरह ही थे। इसलिए बात- बात पर धमकाना, दंड़ देना, तंग करना उनका स्वभाव हो गया था। लखनऊ कांग्रेस में किसानों के एक प्रतिनिधि श्री रामकुमार शुक्ल द्वारा जब ये बातें गाँधी जी तक पहुँची और किसानों पर होने वाले अत्याचारों की कहानियाँ सुनी, तो उन्होंने उन पीडि़त लोगों की सहायता करने का निश्चय कर लिया। वे समझते थे कि यद्यपि "निलहे गोरे" इन लोगों पर अपने स्वार्थ की दृष्टि से ही जुल्म करते रहते हैं, पर इसमें किसानों के अज्ञान, निरक्षरता तथा कितनी ही हानिकारक रूढि़यों का दोष भी कम नहीं है। इसलिए एक तरफ तो गोरों के अन्यायों के विरुद्ध आंदोलन आरंभ किया गया और दूसरी तरफ कुछ ऐसे चुने हुए कार्यकर्ताओं को गुजरात और महाराष्ट्र प्रांतों से बुलाया गया, जो केवल सेवाभाव से बिहार के पिछ्डे़ गाँवों में रहकर, वहाँ की समस्त असुविधायें सहन करके, साथ ही गोरों की धमकियों की परवाह न करके, किसानों में सुधार का कार्य करते रहें। इन्हीं कार्यकर्ताओं में से एक अवंतिका बाई गोखले भी थी।

अवंतिका बाई बंबई की रहने वाली सुशिक्षित, सुसभ्य महिला थी, जो विलायत जाकर अंग्रेजों की सामाजिक प्रथाओं का अच्छा अनुभव प्राप्त कर चुकी थी। उसका पति श्री बबनराव इंगलैंड में ५ वर्ष तक एक अंग्रेज परिवार में रहा था और वे लोग उसकी योग्यता और सज्जनता को देखकर उसके साथ अपनी एक लड़की का विवाह करने को तैयार थे। बंबई में वे बढि़या मकान में रहते थे, जिसमें बिजली और गैस आदि की सब सुविधायें प्राप्त थी और बिहार के जिन गाँवों में उनको कई महीने रहना था, उनमें एक अच्छी लालटेन का मिल सकना भी कठिन था। पर गाँधी जी का आदेश मिलते ही वे दोनों पति- पत्नी चंपारन के लिए चल पडे़। अब तक वे सदैव सैकेंड क्लास में सफर किया करते थे, पर इस बार गाँधी जी के बुलाने पर जा रहे थे, इसलिए थर्ड क्लास में ही सवार हुए। महात्मा जी के पास पहले से ही खबर पहुँच गई थी, इसलिए उन्होंने कुछ लोगों को उनको लाने को भेजा, जिनमें देवदास गाँधी (महात्मा जी के सबसे छोटे पुत्र) भी थे। वे कहने लगे कि अवंतिका बाई तो दूसरे दर्जे में आयेंगी। महात्मा जी ने कहा- "अगर वे तीसरे दर्जे में आयेंगी तो उन्हें यहाँ रखूँगा, वरनाबंबई ही वापस भेज दूँगा।" गाडी़ रात के एक बजे आती थी। देवदास ने अवंतिका बाई को दूसरे दर्जे के डिब्बे में ही ढूँढा और जब वे न मिली तो कुछ देर बाद वापस चले आये। पर अवंतिका बाई अपने पति के साथ इससे पहले ही तीसरे दर्जे से उतरकर गाँधी जी के पास पहुँचकर एक कमरे में ठहर गई थी। देवदास ने महात्मा जी से कहा कि "अवंतिका बाई तो इस गाडी़ में नहीं आई।" यह सुनकर सब लोग हँसने लगे और महात्मा जी ने कहा- "मैंने तो पहले ही कहा था कि अवंतिका बाई तीसरे दर्जे में आयेगी।"

महात्मा गाँधी में मनुष्य के अंतःकरण को पहिचानने की विलक्षण शक्ति थी। इसी के बल पर उन्होंने उस "अंग्रेजियत" के दौर- दौरा के युग में ऐसे व्यक्तियों को ढूँढ़कर निकाल लिया, जिन्होंने बिना किसी आनाकानी के तुरंत अपने वैभवशाली जीवन क्रम का त्याग कर दिया और रेशम के स्थान पर मोटा खद्दर पहनकर जन- सेवा के कार्य में संलग्न हो गये। अवंतिका बाई भी गाँधी जी की इस कसौटी पर खरी उतरी। उनके जीवन का उद्देश्य जनसेवा ही था, और जब उन्होंने गांधी जी के सिद्धांतों की वास्तविकता को समझ लिया तो स्वयं तदनुसार परिवर्तित होने में देर न लगाई।

2 Last


Other Version of this book



अवन्तिका बाई गोखले
Type: TEXT
Language: HINDI
...


Releted Books



The Pioneers Of Scientific Spirituality
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

वैज्ञानिक अध्यात्म के क्रान्ति दीप
Type: TEXT
Language: HINDI
...

वैज्ञानिक अध्यात्म के क्रान्ति दीप
Type: SCAN
Language: HINDI
...

लोक-मानस का परिष्कृत मार्गदर्शन
Type: TEXT
Language: HINDI
...

लोक-मानस का परिष्कृत मार्गदर्शन
Type: SCAN
Language: HINDI
...

सेवा साधना और उसके सिद्धांत
Type: SCAN
Language: HINDI
...

चेतना की शिखर यात्रा-२
Type: SCAN
Language: EN
...

चेतना की शिखर यात्रा-१
Type: SCAN
Language: EN
...

ચેતનાની શિખરયાત્રા ભાગ - ૧
Type: SCAN
Language: EN
...

चेतना की शिखर यात्रा-३
Type: SCAN
Language: EN
...

बिना शर्त अनुदान नहीं
Type: SCAN
Language: HINDI
...

बिना शर्त अनुदान नहीं
Type: TEXT
Language: HINDI
...

The Pioneers Of Scientific Spirituality
Type: SCAN
Language: ENGLISH
...

वैज्ञानिक अध्यात्म के क्रान्ति दीप
Type: TEXT
Language: HINDI
...

वैज्ञानिक अध्यात्म के क्रान्ति दीप
Type: SCAN
Language: HINDI
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-2/4
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-2/3
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-2/2
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-1/5
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-1/4
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-1/3
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-2/5
Type: SCAN
Language: EN
...

महापुरुषों के अविस्मरणीय जीवन प्रसंग-2/1
Type: SCAN
Language: HINDI
...

స్వాతంత్ర్య సంగ్రామ సేనాని
Type: SCAN
Language: TELUGU
...

Articles of Books

  • सेवा व्रत का आदर्श उपस्थित करने वाली- अवंतिका बाई गोखले
  • निरक्षर से विदुषी कैसे बनी
  • निरक्षर से विदुषी कैसे बनी
  • पति की सेवा
  • समाज- सेवा का व्रत-
  • शिशु पालन गृह की स्थापना-
  • हिंद महिला समाज-
  • प्रत्येक सत्कार्य में सहायता-
  • खादी प्रेम और प्रचार के लिए उद्योग-
  • बंबई कारपोरेशन में सेवा कार्य-
  • राष्ट्रीय आंदोलन में जेल जाना-
  • देशभक्त दंपत्ति-
  • पति की बीमारी कारण कार्यक्रम में परिवर्तन
  • अवंतिका बाई की विशेषताएँ-
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj