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मनुष्य के मूल्यांकन का आधार-आध्यात्मिकता

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मनुष्य के मूल्यांकन का आधार—आध्यात्मिकता


गायत्री मंत्र हमारे साथ-साथ —

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।


मित्रो! मुझे मथुरा की एक घटना याद आ जाती है। मथुरा में एक बार रामलीला हो रही थी। रामलीला में कुछ बच्चों को बंदर बना दिया, कुछ को रीछ, नल, नील और हनुमान। एक को लंगूर बना दिया। लंगूर कैसा होता है? कैसे बनाया? उन्होंने लंगूर ऐसे बनाया कि उस बच्चे के शरीर पर शीरा पोत दिया। शीरा जानते हैं, किससे बनता है? गुड़ में से निकलता है। बच्चों ने आपस में रूई चिपका दी और वह बन गया लंगूर। उसके एक पूँछ लगा दी और वह लँगोटी लगाकर उछलता फिरा। साहब यह रामलीला का लंगूर है। एकाध घंटे तक वह उछलता फिरा, फिर जमीन पर गिरा। अरे! लंगूर को क्या हुआ? उसे उठाकर ले गए और पंखा झलने लगे। लंगूर बेहोश हो गया। अब क्या करें, उसे पानी पिलाया, फिर भी होश में नहीं आया। उसकी आँखें पलट गईं। आखिर में लंगूर को अस्पताल ले गए। अस्पताल वालों ने कहा कि यह तुमने क्या कर डाला? क्यों साहब! इसमें क्या हर्ज हो गया? इसके शरीर से जो भाप निकलती थी, पसीना निकलता था, जो शरीर के जहर को बाहर निकालता है। तुमने शरीर पर शीरा चिपका करके उसे अंदर ही रोक दिया है। अब तो यह इस जहर की वजह से मर जाएगा। डॉक्टर ने फौरन रूई को हटाया और शीरे को हटाया। उस शीरे को धोकर साफ किया, तो देखा कि अब तक सारे शरीर में इतना जहर फैल चुका था कि उसको बचाना संभव न हो सका। बहुत इलाज किया गया, किंतु एक घंटे के उस जहर का परिणाम बच्चे की जान लेकर सामने आया।