बसंत पंचमी पर अखण्ड ज्योति के सान्निध्य में सामूहिक साधना—श्रद्धा, संकल्प और आशीर्वाद का अद्वितीय संगम
|| 23 जनवरी, हरिद्वार | शताब्दी समारोह 2026 ||
बसंत पंचमी का पावन प्रभात शताब्दी समारोह 2026 के लिए एक दिव्य अनुभूति बनकर अवतरित हुआ—जहाँ ऋतुराज बसंत की कोमलता, साधना की गंभीरता और युग-परिवर्तन का संकल्प एकाकार हो गया।
इस पवित्र अवसर पर परम् आदरणीया श्रद्धेया जिजी, जन्मशताब्दी के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी तथा आदरणीया शैफाली जिजी द्वारा शांतिकुंज में विगत 100 वर्षों से सतत प्रज्वलित अखण्ड दीपक को विधिपूर्वक लाकर वैरागी कैंप स्थित शताब्दी समारोह स्थल पर स्थापित किया गया। अखण्ड ज्योति की यह स्थापना मानो परम पूज्य गुरुदेव की सजीव उपस्थिति का अनुभव करा रही थी।
अखण्ड दीपक के सान्निध्य में सभी श्रद्धालुओं एवं गायत्री परिजनों ने एक स्वर में 108 बार गायत्री महामंत्र का सामूहिक जप किया। मंत्रोच्चार से गुंजायमान वातावरण में प्रत्येक हृदय में शांति, चेतना और आत्मबल का संचार स्पष्ट अनुभूत हुआ।
साधना के उपरांत प्रत्येक श्रद्धालु को परम पूज्य गुरुदेव एवं परम वंदनीया माताजी की चरण-पादुका के दर्शन एवं आशीर्वाद का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह क्षण अनेक साधकों के लिए जीवन की अमूल्य स्मृति बन गया।
इस पावन अवसर पर आदरणीया श्रद्धेया जिजी के करकमलों से सभी को परम वंदनीया माताजी द्वारा लिखित संकल्प—
“या तो अभी, या कभी नहीं” का प्रसाद प्राप्त हुआ। यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन को साधना, सेवा और युग-निर्माण के लिए समर्पित करने का जाग्रत आह्वान बनकर प्रत्येक हृदय में अंकित हो गया।
बसंत पंचमी का यह दिन शताब्दी समारोह के अंतर्गत श्रद्धा से संकल्प, साधना से संकल्पना और आशीर्वाद से युग-निर्माण की ओर बढ़ते कदमों का दिव्य साक्ष्य बना।
