शिक्षक जागरण से होगा सशक्त राष्ट्र निर्माण
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में 25 एवं 26 मई को आयोजित दो दिवसीय “शिक्षक गरिमा शिविर” में उत्तर प्रदेश से पधारे लगभग 700 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिविर का उद्देश्य शिक्षकों में कर्तव्यबोध, नैतिक मूल्यों, संस्कारमय शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता विकसित करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
अपने प्रेरणाप्रद उद्बोधन में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि शिक्षक केवल विषय ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण का आधार स्तंभ होता है। जब शिक्षक अपने दायित्व को साधना भाव से निभाता है, तब समाज में सकारात्मक परिवर्तन की धारा स्वतः प्रवाहित होने लगती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल रोजगार तक सीमित न रखकर जीवन निर्माण, संस्कार संवर्धन एवं व्यक्तित्व परिष्कार का माध्यम बनाना अत्यंत आवश्यक है। शिविर के दौरान शिक्षकों को नैतिक शिक्षा, अनुशासन, पारिवारिक संस्कार, भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रभक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित शिक्षकों ने शिक्षा के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा विद्यार्थियों में संस्कारवान एवं राष्ट्रनिष्ठ चेतना विकसित करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में शांतिकुंज परिवार के कार्यकर्ता, शिक्षाविद एवं उत्तर प्रदेश से आए शिक्षकगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह शिविर शिक्षक जागरण एवं मूल्यनिष्ठ शिक्षा के माध्यम से सशक्त राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुआ।

