योग केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि उत्कृष्ट जीवन जीने की सतत साधना है।
आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में योग साधना का भव्य आयोजन उत्साह एवं श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति एवं अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी तथा शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया।
इस अवसर पर गायत्री विद्यापीठ के विद्यार्थियों, देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के युवाओं, आचार्यगण, अधिकारियों, शांतिकुंज के अंतेवासी कार्यकर्ताओं तथा देश-विदेश से पधारे गायत्री परिजनों ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सामूहिक योगाभ्यास किया।
अपने प्रेरक उद्बोधन में डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की पद्धति नहीं, बल्कि चेतना के उत्कर्ष, आत्मपरिष्कार और आत्मविकास का विज्ञान है। उन्होंने कहा कि परम पूज्य गुरुदेव युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी द्वारा प्रतिपादित प्रज्ञायोग व्यक्ति को जागरूक, संतुलित एवं लोकमंगल के प्रति समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। योग का वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर निहित दिव्यता का जागरण एवं उत्कृष्ट जीवन मूल्यों की स्थापना है।
12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Day of Yoga) के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार का वैश्विक प्रज्ञायोग अभियान भारत सहित विश्व के अनेक देशों में उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के योग प्रशिक्षकों एवं शांतिकुंज के योग साधकों के निर्देशन में हजारों साधकों ने प्रज्ञायोग का अभ्यास कर स्वस्थ शरीर, संतुलित मन, जागृत चेतना एवं संस्कारित जीवन के संकल्प को आत्मसात किया।

