देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में साधना संस्कृति का एक नवीन अध्याय...
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में ध्यान-साधना हेतु माँ गायत्री की 24 धाराओं के नाम पर निर्मित की जा रही 24 ध्यान-कुटियों के निर्माण कार्य का शुभारम्भ हुआ।
आज इस क्रम में निर्मित प्रथम ध्यान-कुटी का शुभ उद्घाटन गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।
इस पावन अवसर पर शांतिकुंज के व्यवस्थापक श्री योगेंद्र गिरि जी एवं विश्वविद्यालय के सभी सम्मानित अधिकारीगण और कार्यकर्तागण भी उपस्थित रहे। सभी ने परमपूज्य गुरुदेव एवं परम वन्दनीया माताजी का भावपूर्ण स्मरण करते हुए एक स्वर में गायत्री महामंत्र का सामूहिक उच्चारण किया। मंत्रमय वातावरण ने सम्पूर्ण परिसर को साधना, श्रद्धा और दिव्य चेतना से अनुप्राणित कर दिया।
प्राकृतिक सौन्दर्य की गोद में विकसित हो रहा यह ध्यान-कुटी परिसर भविष्य में साधकों के लिए आत्मचिन्तन, ध्यान एवं आध्यात्मिक साधना का एक अद्वितीय केन्द्र सिद्ध होगा। यह पहल देव संस्कृति विश्वविद्यालय की साधना-आधारित जीवनदृष्टि को और अधिक सशक्त एवं साकार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
