• News
  • Blogs
  • Gurukulam
English हिंदी
  • Login

Blogs Posts

Impact Summit Sessions at Various Locations

Blog Home Page

Recent Blogs

हमारी वसीयत और विरासत (भाग 139): मनीषी के रूप में हमारी प्रत्यक्ष भूमिका
हमने अपने भावी जीवनक्रम के लिए जो महत्त्वपूर्ण निर्धारण किए हैं, उनमें सर्वोपरि है— लोक-चिंतन को सही दिशा देने हेतु एक ऐसा विचार-प्रवाह खड़ा करना, जो किसी भी स्थिति में अवांछनीयताओं को टिकने ही न दे। आज जनसमुदाय के मन-मस्तिष्क में जो दुर्मति घुस पड़ी है, उसी की परिणति ऐसी परिस्थितियों के रूप में नजर आती है, जिन्हें जटिल, भयावह समझा जा रहा है। ऐसे वातावरण को बदलने के लिए व्यास की तरह— बुद्ध, गांधी, कार्ल मार्क्स की तरह— मार्टिन लूथर किंग, अरविंद, महर्षि रमण की तरह— भूमिका निभाने वाले मुनि व ऋषि के युग्म की आवश्यकता है, जो प्रत्यक्ष एवं परोक्ष प्रयासों द्वारा विचार-क्रांति का प्रयोजन पूरा कर सके। यह पुरुषार्थ अंतःक्षेत्र की प्रचंड तप-साधना द्वारा ही संभव हो सकता है। इसका प्रत्यक्ष रूप युगमनीषा क...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 138): मनीषी के रूप में हमारी प्रत्यक्ष भूमिका
साहित्य की आज कहीं कमी है? जितनी पत्र-पत्रिकाएँ आज प्रकाशित होती हैं; जितना साहित्य नित्य विश्व भर में छपता है, उस पहाड़ के समान सामग्री को देखते हुए लगता है, वास्तव में मनीषी बढ़े हैं; पढ़ने वाले भी बढ़े हैं। लेकिन इन सबका प्रभाव क्यों नहीं पड़ता? क्यों एक लेखक की कलम कुत्सा भड़काने में ही निरत रहती है एवं उस साहित्य को पढ़कर तुष्टि पाने वालों की संख्या बढ़ती है। इसके कारण ढूँढ़े जाएँ, तो वहीं आना होगा, जहाँ कहा गया था— ‘‘पावनानि न भविन्त’’। यदि इतनी मात्रा में उच्चस्तरीय— चिंतन को उत्कृष्ट बनाने वाला साहित्य रचा गया होता एवं उसकी भूख बढ़ाने का माद्दा जनसमुदाय के मन में पैदा किया गया होता, तो क्या ये विकृतियाँ नजर आतीं, जो आज समाज में विद्यमान हैं। दैनंदिन जीवन की समस्याओं का समाधान यदि संभव है तो व...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 137): मनीषी के रूप में हमारी प्रत्यक्ष भूमिका
मनुष्य अपनी अंतःशक्ति के सहारे प्रसुप्त के प्रकटीकरण द्वारा ऊँचा उठता है। यह जितना सही है, उतना ही यह भी मिथ्या नहीं कि तप-तितिक्षा से प्रखर बनाया गया वातावरण, शिक्षा, सान्निध्य-सत्संग, परामर्श-अनुकरण भी अपनी उतनी ही सशक्त भूमिका निभाता है। देखा जाता है कि किसी समुदाय में नितांत साधारण श्रेणी के सीमित सामर्थ्यसंपन्न व्यक्ति एक प्रचंड प्रवाह के सहारे असंभव पुरुषार्थ भी संभव कर दिखाते हैं। प्राचीनकाल में मनीषी-मुनिगण यही भूमिका निभाते थे। वे युग-साधना में निरत रहे। लेखनी-वाणी के सशक्त तंत्र के माध्यम से जनमानस के चिंतन को उभारते थे। ऐसी साधना अनेक उच्चस्तरीय व्यक्तित्वों को जन्म देती थी— उनकी प्रसुप्त सामर्थ्य को उजागरकर उन्हें सही दिशा देकर समाज में वांछित परिवर्तन लाती थी। शरीर की दृष्टि से ...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 136): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
प्रतिभाहीनों की बात जाने दीजिए। वे तो अपनी क्षमता और बुद्धिमत्ता को चोरी, डकैती, ठगी जैसे नीच कर्मों में भी लगा सकते हैं, पर जिनमें भावना भरी हो, वे अपने साधारण पराक्रम से समय को उलटकर कहीं-से-कहीं ले जा सकते हैं। स्वामी दयानंद, श्रद्धानंद, रामतीर्थ जैसों के कितने ही उदाहरण सामने हैं, जिनकी दिशाधारा बदली, तो वे असंख्यों को बदलने में समर्थ हो गए। इन दिनों प्रतिभाएँ विलासिता में, संग्रह में, अहंकार की पूर्ति में निरत हैं। इसी निमित्त वे अपनी क्षमता और संपन्नता को नष्ट करती रहती हैं। यदि इनमें से थोड़ी-सी भी अपना ढर्रा बदल दें, तो गीताप्रेस वाले जयदयाल गोयंदका की तरह ऐसे साधन खड़े कर सकती हैं, जिन्हें अद्भुत और अनुपम कहा जा सके। कौन प्रतिभा, किस प्रकार बदली जानी है और उससे क्या काम लिया जाना है, ...
Read More
विश्वास के युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अंतिम आविष्कार और बढ़ता हुआ जोखिम
आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हम मानव-सभ्यता की पूरी ऐतिहासिक यात्रा के ऐसे मोड़ से गुजर रहे हैं, जहाँ technology बाकी सारे संस्थानों से कहीं अधिक तेज़ी से आगे बढ़ रही है। हम लोग अभी अंदर इसी बात पर चर्चा कर रहे थे कि जो गति आज की तकनीक की है, वह हमारे सामाजिक, नैतिक और शासन-संबंधी ढाँचों से कहीं आगे निकल चुकी है। मैं अंदर ही अंदर Geoffrey Hinton (जो “godfather of AI” और Turing Award winner हैं) को कोट कर रहा था कि उन्होंने स्वयं कहा है कि “this is a threat to humanity, this is our final invention, इसके बाद humanity कोई और invention करेगी नहीं, और यह हम लोगों का अंतिम invention है।” ऐसे समय में सोचना अनिवार्य हो जाता है कि जो हम बना रहे हैं, वह कहीं गलत हाथों में तो नहीं जा रहा है। अ...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 135): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
ऐसे उदाहरणों से इतिहास भरा पड़ा है, जिसमें कितनी ही प्रतिभाओं को किन्हीं मनस्वी आत्मवेत्ताओं ने बदलकर कुछ-से-कुछ बना दिया। उनकी अनुकंपा न हुई होती, तो वे जीवन भर अपने उसी पुराने ढर्रे पर लुढ़कते रहते, जिस पर कि उनका परिवार चल रहा था। हमारी अपनी बात भी ठीक ऐसी ही है। यदि गुरुदेव ने उलट न दिया होता तो हम अपने पारिवारिकजनों की तरह पौरोहित्य का धंधा कर रहे होते या किसी और काम में लगे रहते। उस स्थान पर पहुँच ही न पाते, जिस पर कि हम अब पहुँच गए हैं। इन दिनों युग-परिवर्तन के लिए कई प्रकार की प्रतिभाएँ चाहिए। विद्वानों की आवश्यकता है, जो लोगों को अपने तर्क-प्रमाणों से सोचने की नई पद्धति प्रदान कर सके। कलाकारों की आवश्यकता है, जो चैतन्य महाप्रभु, मीरा, सूर, कबीर की भावनाओं को इस प्रकार लहरा सकें, जैसे...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 134): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
अब प्रश्न यह रहा है कि पाँच वीरभद्रों को काम क्या सौंपना पड़ेगा और किस प्रकार वे क्या करेंगे? उसका उत्तर भी अधिक जिज्ञासा रहने के कारण अब मिल गया। इससे निश्चिंतता भी हुई और प्रसन्नता भी। इस संसार में आज भी ऐसी कितनी ही प्रतिभाएँ हैं, जो दिशा पलट जाने पर अभी जो कर रही हैं, उसकी तुलना में अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य करने लगेंगी। उलटे को उलटकर सीधा करने के लिए जिस प्रचंड शक्ति की आवश्यकता होती है, उसी को हमारे अंग-अंग— वीरभद्र करने लगेंगे। प्रतिभाओं की सोचने की यदि दिशा बदली जा सके तो उनका परिवर्तन चमत्कारी जैसा हो सकता है। नारद ने पार्वती, ध्रुव, प्रह्लाद, वाल्मीकि, सावित्री आदि की जीवन-दिशा बदली, तो वे जिन परिस्थितियों में रह रहे थे, उसे लात मारकर दूसरी दिशा में चल पड़े और संसार के लिए एक अनुकरणी...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 133): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
हमारी जिज्ञासाओं एवं उत्सुकताओं का समाधान गुरुदेव प्रायः हमारे अंतराल में बैठकर ही किया करते हैं। उनकी आत्मा हमें अपने समीप ही दृष्टिगोचर होती रहती है। आर्षग्रंथों के अनुवाद से लेकर प्रज्ञा पुराण की संरचना तक जिस प्रकार लेखन प्रयोजन में उनका मार्गदर्शन अध्यापक और विद्यार्थी जैसा रहा है, हमारी वाणी भी उन्हीं की सिखावन को दुहराती रही है। घोड़ा जिस प्रकार सवार के संकेतों पर दिशा और चाल बदलता रहता है, वही प्रक्रिया हमारे साथ भी कार्यान्वित होती रही है। बैटरी चार्ज करने के लिए जब हिमालय बुलाते हैं, तब भी वे कुछ विशेष कहते नहीं। सेनिटोरियम में जिस प्रकार किसी दुर्बल का स्वास्थ्य सुधर जाता है, वही उपलब्धियाँ हमें हिमालय जाने पर हस्तगत होती हैं। वार्त्तालाप का प्रयोग अनेक प्रसंगों में होता रहता है। इ...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 132): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
यह सूक्ष्मशरीरों की— सूक्ष्मलोक की सामान्य चर्चा हुई। प्रसंग अपने आपे का है। यह विषम वेला है। इसमें प्रत्यक्ष शरीर वाले प्रत्यक्ष उपाय-उपचारों से जो कर सकते हैं, सो तो कर ही रहे हैं; करना भी चाहिए, पर दीखता है कि उतने भर से काम चलेगा नहीं। सशक्त सूक्ष्मशरीरों को बिगड़ों को अधिक न बिगड़ने देने के लिए अपना जोर लगाना पड़ेगा। सँभालने के लिए जो प्रक्रिया चल रही है, वह पर्याप्त न होगी। उसे और भी अधिक सरल-सफल बनाने के लिए अदृश्य सहायता की आवश्यकता पड़ेगी। यह सामूहिक समस्याओं के लिए भी आवश्यक होगा और व्यक्तिगत रूप से सत्प्रयोजनों में संलग्न व्यक्तित्वों को अग्रगामी-यशस्वी बनाने की दृष्टि से भी। जब हमें यह काम सौंपा गया, तो उसे करने में आनाकानी कैसी? दिव्यसत्ता के संकेतों पर चिरकाल से चलते चले आ रहे हैं ...
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 131): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
यहाँ एक अच्छा उदाहरण हमारे हिमालयवासी गुरुदेव का है। सूक्ष्मशरीरधारी होने के कारण ही वे उस प्रकार के वातावरण में रह पाते हैं, जहाँ जीवन निर्वाह के कोई साधन नहीं हैं। समय-समय पर हमारा मार्गदर्शन और सहायता करते रहते हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि हमें कुछ करना नहीं पड़ा; कोई कठिनाई मार्ग में आई ही नहीं; कभी असफलता मिली ही नहीं। यह भी होता रहा है। पर निश्चित है कि हम एकाकी जो कर सकते थे, उसकी अपेक्षा उस दिव्य सहयोग से मनोबल बहुत बढ़ा-चढ़ा रहा है। उचित मार्गदर्शन मिला है। कठिनाई के दिनों में धैर्य और साहस यथावत् स्थिर रहा है। यह कम नहीं है। इतनी ही आशा दूसरों से करनी भी चाहिए। सब काम करके कोई रख जाएगा, ऐसी आशा भगवान से भी नहीं करनी चाहिए। भूल यही होती रही कि दैवी सहायता का नाम लेते ही लोग समझते हैं क...
Read More

Categories
11
20261
51 Kundiya Gayatri Mahayagya1
Aadhyatmikta1
Ai Summit1
Akhand Deep8
Akhand Jyoti971
Awakening2
Awgp8
Awgp News3
Awgp Videos | Hariye Na Himmat | हारिये न हिम्मत1
Bal Sanskar1
Bal Sanskar Shala1
Bal_Sanskar_Shala_Abhiyan1
Bhartiya Sanskriti Gyan Pariksha2
Blood Donation1
Blood Donation And Check Up Camps1
Book विचारों की सृजनात्मक शक्ति1
Book संस्मरण जो भुलाए न जा सकेंगे1
Book हमारी युग निर्माण योजना 1
Catalist Of Change5
Chetna Kendra1
Delhi - Ncr2
Dr. Chinmay Pandya3
Dsvv14
Environment1
Exhibition1
Gahna Karmanogati1
Gayatri Mahayagya1
Gayatri Pariwar7
Gayatri Yagya1
Gujarat5
Gurudev128
Gurudev357
Gurudev Amrut Vanni8
Guru Ji1
Hamari Vasiyat Aur Virasat141
Haridwar6
Janmshatabdi10
Jeevan Jine Ki Kala138
Jeevan Ka Arth138
Jeevan Kaushal139
Jeevan Lakshya140
Jeevan Mantra137
Jeevan Mulya135
Jeevan Parichay140
Jeevan Path135
Jeevan_Sadhana134
Jeevan Sadhna136
Jeevan Shaily136
Jeevan Shakti134
Jharkhand4
Jss6
Kalash Yatra2
Karma1
Kripa Katha8
Kumbh1
Madhya Pradesh7
Maharashtra16
Mata Bhagwati Devi Sharma3
Mata Ji2
Mataji1
Mata Ji2
Mumbai Ashwamedh Yagya 40
Nari Jagran1
Odisha1
Parv / Festival3
Prachar - Prasaar1
Pragya Abhiyan10
Rajasthan4
Rishichintan1
Sadhna Abhiyan4
Sanskar1
Services1
Shantikunj27
Shishy Ki Kalam Se1
Shok Sandesh2
Spirituality 3
Spirituality3
Students1
Tree Plantation1
Uttarakhand8
Uttar Pradesh7
Vangmay4
Vichar Kranti Abhiyan1
Videsh / Abroad7
West Bengal1
Yagya20
Yagya Campaign2
Yug Sahitya95
अदभुत आश्चर्यजनक किन्तु सत्य88
अध्यात्म 524
आज का सद्चिंतन278
आत्मचिंतन के क्षण77
कहानियां 70
कहानियाँ प्रज्ञा पुराण से60
गायत्री और यज्ञ 27
जीवन जीने की कला570
नवरात्रि 19
पर्व एवम त्योहार2
प्रज्ञा पुराण (भाग 1)1
विचार क्रांति323
स्वास्थ्य2

View count

145502296

Popular Post

मौनं सर्वार्थ साधनम
Dec. 22, 2023, 12:13 p.m.
मौन साधना की अध्यात्म-दर्शन में बड़ी महत्ता बतायी गयी है। कहा गया है “मौनं सर्वार्थ साधनम्।” मौन रहने से सभी कार्य पूर्ण होते हैं। महात्मा गाँधी कहते ...
Read More
प्रयागराज महाकुम्भ में 13 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है गायत्री परिवार का शिविर
Jan. 9, 2025, 5:59 p.m.
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 13 जनवरी 2025 से प्रारंभ हो रहे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन महाकुंभ में गायत्री परिवार द्वारा शिविर 13 जनवरी से प...
Read More
अध्यात्मवाद
Dec. 9, 2023, 4:10 p.m.
वर्तमान की समस्त समस्याओं का एक सहज सरल निदान है- ‘अध्यात्मवाद’। यदि शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक जैसे सभी क्षेत्रों में अध्यात्मवाद का समावेश कर ...
Read More
आद डॉ पंड्या आबूधाबी UAE में -संयुक्त राष्ट्र के अंग AI Faith & Civil Society Commission के मुख्य प्रवक्ता
Feb. 27, 2024, 6:14 p.m.
मुम्बई अश्वमेध महायज्ञ के सफल आयोजन के उपरान्तअखिल विश्व गायत्री परिवार प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या ज...
Read More
मूर्खता के लक्षण
July 1, 2024, 9:55 a.m.
मूर्खता के लक्षण छोड़ेंगे तब सद्गुण धारण कर सकेंगे. आगे ऐसे कई मुर्ख के लक्षण बताए गए थे, और भी कुछ लक्षण यहाँ बताए है, श्री समर्थ रामदास स्वामी कहते ह...
Read More
जहर की पुड़िया रखी रह गई
April 19, 2024, 12:25 p.m.
मेरे दादा जी की गिनती इलाके के खानदानी अमीरों में होती थी। वे सोने-चाँदी की एक बड़ी दुकान के मालिक थे। एक बार किसी लेन-देन को लेकर दादाजी और पिताजी में...
Read More
शताब्दी वर्ष-2026 के निमित्त विशिष्ट अभियान : ज्योति कलश यात्राएँ
April 25, 2024, 10:42 a.m.
हम स्वयं जागें, सौ-सौ को जगाएँ, इस ऐतिहासिक वेला में पावन गुरूसत्ता को दें एक सार्थक श्रद्धांजलि भारतीय संस्कृति में पर्वों का विशेष महत्त्व है। ये हम...
Read More
आत्मबल
Jan. 14, 2024, 10:44 a.m.
महापुरुष की तपस्या, स्वार्थ-त्यागी का कष्ट सहन, साहसी का आत्म-विसर्जन, योगी का योगबल ज्ञानी का ज्ञान संचार और सन्तों की शुद्धि-साधुता आध्यात्मिक बल का...
Read More
स्नेह सलिला, परम श्रद्धेया जीजी द्वारा एक विशाल शिष्य समुदाय को गायत्री मंत्र से दीक्षा
Feb. 23, 2024, 4:03 p.m.
गुरु का ईश्वर से साक्षात संबंध होता है। गुरु जब अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा का कुछ अंश शिष्य को हस्तांतरित करता है तो यह प्रक्रिया गुरु दीक्षा कहलाती है।  ग...
Read More
देश दुनिया में हो रहा युग चेतना का विस्तार ः डॉ चिन्मय पण्ड्या
July 12, 2024, 5:53 p.m.
आदरणीय डॉ चिन्मय पण्ड्या जी अपने सात दिवसीय विदेश प्रवास के बाद आज स्वदेश लौटे। हरिद्वार 12 जुलाई। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय ...
Read More
About Shantikunj

Shantikunj has emerged over the years as a unique center and fountain-head of a global movement of Yug Nirman Yojna (Movement for the Reconstruction of the Era) for moral-spiritual regeneration in the light of hoary Indian heritage.

Navigation Links
  • Home
  • Literature
  • News and Activities
  • Quotes and Thoughts
  • Videos and more
  • Audio
  • Join Us
  • Contact
Write to us

Click below and write to us your commenct and input.

Go

Copyright © SRI VEDMATA GAYATRI TRUST (TMD). All rights reserved. | Design by IT Cell Shantikunj