पटना में “AI : चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित
"AI: चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर आयोजित विशेष राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों एवं आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े गणमान्य व्यक्तित्वों ने सहभागिता कर Artificial Intelligence के वर्तमान और भविष्य पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ . चिन्मय पंड्या, माननीय लोकसभा सांसद श्री रवि शंकर प्रसाद जी, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री सचिन चतुर्वेदी जी तथा स्ट्रेटेजिक फॉरसाइट ग्रुप के संस्थापक संदीप वासेलकर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में अतिथियों ने एआई के उपयोग, उसके सामाजिक प्रभाव, नैतिक चुनौतियों तथा मानव जीवन में उसकी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा अध्यात्म और एआई के समन्वय पर किए जा रहे कार्यों की विशेष सराहना की गई।
माननीय रविशंकर प्रसाद जी ने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस युग में सरकारें और संस्थान बेहतर नीतियाँ बना सकते हैं तथा अवसर प्रदान कर सकते हैं, किंतु इसके मानवीय पक्षों में जनचेतना के जागरण का कार्य विश्वभर में फैले अखिल विश्व गायत्री परिवार जैसे आध्यात्मिक संस्थान ही प्रभावी रूप से कर सकते हैं।
वहीं, प्रो. सचिन चतुर्वेदी जी एवं संदीप वासेलकर जी ने कहा कि वर्तमान समय में अध्यात्म और एआई के क्षेत्र में आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में उभरकर सामने आए हैं, जिन्हें विश्व स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मानवीय, नैतिक एवं सामाजिक आयामों के कुशल मार्गदर्शक के रूप में आशा भरी दृष्टि से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. पंड्या जी के पास विश्व मानवता के समक्ष एआई से जुड़ी चुनौतियों के समाधान हेतु श्रेष्ठ अनुभव एवं दूरदृष्टि उपलब्ध है।*
अपने विचार रखते हुए आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि तकनीक तभी सार्थक है जब वह मानवीय संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और वैश्विक कल्याण के साथ जुड़कर कार्य करे। उन्होंने युवाओं से एआई का उपयोग मानवता, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज निर्माण के लिए सकारात्मक दिशा में करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों का सम्मान किया गया तथा प्रतिभागियों ने एआई (AI) और अध्यात्म के संतुलित समन्वय को भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।

