RISHI WISDOM
आधुनिक तकनीक का मानव मूल्य से समन्वय:
विज्ञान का उपनयन संस्कार
विज्ञान मानव बुद्धि की महान उपलब्धि है। उसने प्रकृति के रहस्यों को उजागर कर जीवन को सुविधाजनक बनाया है। प्रारम्भिक काल में विज्ञान केवल सिद्धान्तों तक सीमित था, परन्तु प्रयोगों और आविष्कारों के माध्यम से उसने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। बिजली, संचार, चिकित्सा और तकनीक के विकास ने मनुष्य को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान की। किंतु इस प्रगति के साथ विज्ञान का नैतिक और आध्यात्मिक परिष्कार नहीं हो सका। परिणामस्वरूप विज्ञान कभी-कभी विनाश का कारण भी बना है।
विज्ञान तर्क और सत्य की खोज करता है, पर उसकी सीमा पदार्थ तक ही रहती है। दूसरी ओर अध्यात्म मनुष्य को मूल्य, संयम और मानवता का बोध कराता है। यदि विज्ञान को अध्यात्म का मार्गदर्शन मिले तो वह केवल भौतिक सुख-सुविधाओ...
विज्ञान का उपनयन संस्कार कराया जाय
विज्ञान ऊर्जा का प्रतिनिधि है। उसके द्वारा मानव पंच महाभूतों पर स्वामित्व प्रस्थापित करने की महत्वाकांक्षा रखता है। विज्ञान ने न्यूटन के काल तक मुख्यतः सैद्धान्तिक क्षेत्र में ही विचरण किया तब तक मानव उसके प्रति कौतूहल दृष्टि से देखता था। मानो वह उसकी बाल्यावस्था थी। फेरडे का विद्युत चुम्बकीय सिद्धान्त जब विज्ञान के व्यावहारिक क्षेत्र में आया तब से मानव के दैन दिन आधिभौतिक जीवन में कतिपय सुख सुविधाएँ वैज्ञानिक आविष्कारों ने प्रदान की और मानव का आत्म विश्वास बढ़ाया।
परन्तु बाल्यावस्था से यौवन में प्रवेश करते समय विज्ञान का उपनयन संस्कार नहीं हुआ। इसलिए वैचारिक आध्यात्मिक क्षेत्र में समाज के प्रगतिशील पुनर्जीवनीकरण में विज्ञान मार्ग दर्शन नहीं कर सका। विज्ञान स्वयं असंस्कारित रहा और मानव के व...

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