आधुनिक तकनीक का मानव मूल्य से समन्वय:
विज्ञान का उपनयन संस्कार
विज्ञान मानव बुद्धि की महान उपलब्धि है। उसने प्रकृति के रहस्यों को उजागर कर जीवन को सुविधाजनक बनाया है। प्रारम्भिक काल में विज्ञान केवल सिद्धान्तों तक सीमित था, परन्तु प्रयोगों और आविष्कारों के माध्यम से उसने मानव जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया। बिजली, संचार, चिकित्सा और तकनीक के विकास ने मनुष्य को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान की। किंतु इस प्रगति के साथ विज्ञान का नैतिक और आध्यात्मिक परिष्कार नहीं हो सका। परिणामस्वरूप विज्ञान कभी-कभी विनाश का कारण भी बना है।
विज्ञान तर्क और सत्य की खोज करता है, पर उसकी सीमा पदार्थ तक ही रहती है। दूसरी ओर अध्यात्म मनुष्य को मूल्य, संयम और मानवता का बोध कराता है। यदि विज्ञान को अध्यात्म का मार्गदर्शन मिले तो वह केवल भौतिक सुख-सुविधाओं का साधन न रहकर लोकमंगल का माध्यम बन सकता है। इसी प्रकार वैज्ञानिक दृष्टि के बिना अध्यात्म अंधविश्वास और रूढ़ियों में फँस सकता है।
अतः आवश्यक है कि विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय किया जाए। विज्ञान का “उपनयन संस्कार” अर्थात् उसे नैतिक मूल्यों से संयमित करना ही सच्ची मानव प्रगति का मार्ग है। तभी विज्ञान सहकार, शांति और समन्वय का साधन बन सकेगा।
अखण्ड ज्योति पत्रिका जनवरी, 1975, पृष्ठ 8
https://www.awgp.org/en/literature/akhandjyoti/1975/January/v1.8
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