तप-तेज के नाश का कारण
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सतयुग के आदि में जंभ नामक एक बड़ा प्रबल दैत्य था। उसने प्रचण्ड तप करके ऐसी शक्ति प्राप्त की थी जिसके बल से उसने सभी देवताओं को परास्त किया।
एक दिन बालखिल्य ऋषियों के आश्रम में लक्ष्मीजी बैठी हुई थीं। संयोगवश जंभ दैत्य भी उधर से आ निकला। वह लक्ष्मी की सुन्दरता पर मुग्ध हो गया और उन्हें जबरदस्ती अपने रथ में बिठाकर हरण कर ले चला।
देव गुरु बृहस्पति यह सब देख रहे थे। उनने देवताओं से कहा—बस, अब प्रयोजन सिद्ध हो गया। अब इस पर आक्रमण करो, यह अवश्य मारा जायेगा। देवताओं ने पूछा—इसका क्या कारण है? देव गुरू ने कहा—पर नारी की ओर कुदृष्टि से देखने के कारण अब इसका पूर्व संचित तप नष्ट हो गया। अब इसे हरा देना कुछ कठिन नहीं है। देवताओं ने उस पर आक्रमण किया और प्रतापी जंभ दैत्य को आसानी से मार गिराया।
पर नारी पर कुदृष्टि रखने वाले का तप—तेज नष्ट हो जाता है।
एक दिन बालखिल्य ऋषियों के आश्रम में लक्ष्मीजी बैठी हुई थीं। संयोगवश जंभ दैत्य भी उधर से आ निकला। वह लक्ष्मी की सुन्दरता पर मुग्ध हो गया और उन्हें जबरदस्ती अपने रथ में बिठाकर हरण कर ले चला।
देव गुरु बृहस्पति यह सब देख रहे थे। उनने देवताओं से कहा—बस, अब प्रयोजन सिद्ध हो गया। अब इस पर आक्रमण करो, यह अवश्य मारा जायेगा। देवताओं ने पूछा—इसका क्या कारण है? देव गुरू ने कहा—पर नारी की ओर कुदृष्टि से देखने के कारण अब इसका पूर्व संचित तप नष्ट हो गया। अब इसे हरा देना कुछ कठिन नहीं है। देवताओं ने उस पर आक्रमण किया और प्रतापी जंभ दैत्य को आसानी से मार गिराया।
पर नारी पर कुदृष्टि रखने वाले का तप—तेज नष्ट हो जाता है।

