पतिव्रत का तप तेज
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गान्धारी ने अन्धे पति के अनुसरण में अपनी आंखों से पट्टी बांधे रहने का जो व्रत लिया था, उस तप के प्रभाव से उनके नेत्रों में दिव्य शक्ति उत्पन्न हो गई थी।युद्ध में जाने से पूर्व दुर्योधन को नंगे शरीर सामने खड़े करके उस पर दृष्टिपात किया था फल स्वरूप उसका शरीर वज्र जैसा हो गया था उस पर कोई शस्त्र चोट नहीं करता था।दुर्योधन माता के सामने बिलकुल नंगा आने में सकुचाया, कटिप्रदेश पर एक वस्त्र डाल रखा था। दृष्टि न पड़ने से वही स्थान कच्चा रह गया और मल्लयुद्ध के समय श्रीकृष्णजी के इशारे पर भीम ने उस स्थान पर ही गदा प्रहार करके दुर्योधन को मारा।
इसी प्रकार एक बार युधिष्ठिर गांधारी के पास गये। गांधारी क्रोध में बैठी थी। उसकी थोड़ी-सी दृष्टि आंख की पट्टी में नीचे होकर युधिष्ठिर के पैरों के नाखून पर जा पड़ी तो वे नाखून जल कर लाल के स्थान पर काले हो गये।
पतिव्रत एक महान तप है उसकी साधना से नारी महान दिव्य शक्ति उपलब्ध कर सकती है।
इसी प्रकार एक बार युधिष्ठिर गांधारी के पास गये। गांधारी क्रोध में बैठी थी। उसकी थोड़ी-सी दृष्टि आंख की पट्टी में नीचे होकर युधिष्ठिर के पैरों के नाखून पर जा पड़ी तो वे नाखून जल कर लाल के स्थान पर काले हो गये।
पतिव्रत एक महान तप है उसकी साधना से नारी महान दिव्य शक्ति उपलब्ध कर सकती है।

