नरक पीड़ितों को पुण्य का दान
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धर्मराज युधिष्ठिर का वैसे तो सारा जीवन पुण्यमय था पर एक बार उन्होंने अश्वत्थामा के सम्बन्ध में आधा झूठ बोला था। इसके दण्ड स्वरूप उन्हें कुछ समय नरक में भी जाना था।
युधिष्ठिर को पहले नरक में ले जाया गया ताकि उसे प्राप्त कर वे शेष समय स्वर्ग में रहें। जब वे नरक में पहुंचे तो अनेकों प्राणियों को दुःख दण्ड से कराहते देखा। उनका हृदय दया से भर गया और इन्हीं पीड़ितों की सेवा करने के लिए सदा यहीं निवास करने की उन्होंने इच्छा प्रकट की। देवदूतों ने कहा—‘ये पापी लोग हैं इन्हें नरक भुगतना पड़ेगा। आप पुण्यात्मा हैं इसलिये स्वर्ग जावेंगे। यहां आपका रहना संभव नहीं।
तब युधिष्ठिर ने कहा—तो इन्हें भी स्वर्ग ले चलो। देवदूतों ने कहा—यदि आप अपना पुण्य इन्हें दे दें तो ये स्वर्ग जा सकते हैं। युधिष्ठिर ने खुशी-खुशी अपना सारा पुण्य उन दुखियों को दान कर दिया और स्वयं सदा नरक में रहना स्वीकार किया। स्वर्ग के स्वामी इन्द्र उन अकेले नरक में पड़े हुए युधिष्ठिर के पास आये और कहा—आपने अपना पुण्य दान कर दिया, उस दान का जो नया पुण्य आपने कमाया है उसके फलस्वरूप अब आप फिर स्वर्ग के अधिकारी हो गये। उदार हृदय व्यक्ति किसी भी स्थिति में होने पर अपनी उदारता का परिचय देते रहते हैं। उनकी परमार्थ बुद्धि अन्ततः उनके लिए कल्याणकारक ही होती है।
युधिष्ठिर को पहले नरक में ले जाया गया ताकि उसे प्राप्त कर वे शेष समय स्वर्ग में रहें। जब वे नरक में पहुंचे तो अनेकों प्राणियों को दुःख दण्ड से कराहते देखा। उनका हृदय दया से भर गया और इन्हीं पीड़ितों की सेवा करने के लिए सदा यहीं निवास करने की उन्होंने इच्छा प्रकट की। देवदूतों ने कहा—‘ये पापी लोग हैं इन्हें नरक भुगतना पड़ेगा। आप पुण्यात्मा हैं इसलिये स्वर्ग जावेंगे। यहां आपका रहना संभव नहीं।
तब युधिष्ठिर ने कहा—तो इन्हें भी स्वर्ग ले चलो। देवदूतों ने कहा—यदि आप अपना पुण्य इन्हें दे दें तो ये स्वर्ग जा सकते हैं। युधिष्ठिर ने खुशी-खुशी अपना सारा पुण्य उन दुखियों को दान कर दिया और स्वयं सदा नरक में रहना स्वीकार किया। स्वर्ग के स्वामी इन्द्र उन अकेले नरक में पड़े हुए युधिष्ठिर के पास आये और कहा—आपने अपना पुण्य दान कर दिया, उस दान का जो नया पुण्य आपने कमाया है उसके फलस्वरूप अब आप फिर स्वर्ग के अधिकारी हो गये। उदार हृदय व्यक्ति किसी भी स्थिति में होने पर अपनी उदारता का परिचय देते रहते हैं। उनकी परमार्थ बुद्धि अन्ततः उनके लिए कल्याणकारक ही होती है।

