मकर संक्रांति: कृतज्ञता, संतुलन और नवजीवन के संकल्प का पावन पर्व
भारत के विभिन्न प्रांतों में मनाया जाने वाला यह उत्सव केवल फसल कटाई या सूर्य की उत्तरायण यात्रा का प्रतीक नहीं है, बल्कि जीवन में संतुलन, कृतज्ञता और नवजीवन के संदेश को उजागर करता है।
परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी के अनुसार, सूर्य और प्रकृति के प्रतिकृतज्ञता प्रकट करना, आत्मबल और परिश्रम का सम्मान करना, तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और ज्ञान का संचार करना इस पर्व का सार है।
इस दिन लोग नए अनाज, तिल, गुड़ और अन्य प्राकृतिक उपादानों का स्वागत करते हैं, परिवार और समुदाय के साथ मिलकर खुशियाँ बांटते हैं और सामाजिक-सांस्कृतिक मेल को बढ़ावा देते हैं। आइए, इस मकर संक्रांति (जिसे पोंगल और माघ बिहू के नाम से भी जाना जाता है) पर हम अपने जीवन में संतुलन, ऊर्जा और समाज-कल्याण के संकल्प के साथ इस पावन पर्व को सार्थक बनाएं।
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