भारतीय ज्ञान परंपरा और “विकसित भारत” के विमर्श को समर्पित अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संगोष्ठियों का शुभारंभ
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज–हरिद्वार में ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्रीय चिंतन के संगम को समर्पित एक महत्वपूर्ण अकादमिक पहल के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय संगोष्ठियों तथा कार्यशाला श्रृंखला का भव्य शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा World Association of Hindu Academicians (WAHA) तथा Indian Council of Social Science Research (ICSSR) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति, साउथ एशियन इंस्टीट्यूट फॉर पीस एंड रिकॉन्सिलिएशन (SAIPR) के अध्यक्ष आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय श्री सुरेश सोनी जी (सह-सरकार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र में प्रो. नचिकेता तिवारी जी (संयोजक, WAHA कॉन्फ्रेंस 2026), श्री मिलिंद परांडे जी (संगठन सचिव, विश्व हिंदू परिषद), स्वामी विज्ञानानंद जी (संयुक्त महासचिव, विश्व हिंदू परिषद) तथा श्री आलोक कुमार जी (अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद) की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्ता प्रदान की।
स्वागत उद्बोधन देते हुए आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक विमर्श से जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति एवं विद्वान भी विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. टी. सी. तारानाथ जी (कुलपति, हसन विश्वविद्यालय, कर्नाटक), प्रो. टेक्श्वर कुमार जी (कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा) तथा प्रो. अतनु भट्टाचार्य जी (कुलपति, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय) सहित अनेक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता सम्मिलित हुए।
इस आयोजन के अंतर्गत WAHA एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी —
“विकसित भारत: हिंदू बोध के माध्यम से (Viksit Bharat through Hindu Bodh)” आयोजित की जा रही है।
साथ ही ICSSR और DSVV के सहयोग से तीन राष्ट्रीय संगोष्ठियों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिनके विषय हैं—
* Indian Knowledge System: Indian Textual & Oral Tradition
* Indian Knowledge System: On Institutional Leaders
* Indigenous Techniques & Effective Ways of Social Inclusion for Better Mental Health – Concept & Application
Recent Post
विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) एवं शिक्षा
आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिं...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 153): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
कार्यक्रमों में प्रचारात्मक, रचनात्मक और सुधारात्मक अनेक कार्य हैं, जिन्हें घर से बाहर रहते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वित किया जा सकता है। प्रचारात्मक स्तर के कार्य— 1. झोला पुस्तकाल...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 152): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
माना कि आज स्वार्थपरता, संकीर्णता और क्षुद्रता ने मनुष्य को बुरी तरह घेर रखा है, तो भी इस धरती को वीर विहीन नहीं कहा जा सकता। 60 लाख साधु-बाबा यदि धर्म के नाम पर घर-बार छोड़कर मारे-मारे फिर सकते हैं...
विज्ञान को शैतान बनने से रोकें:अनियंत्रित प्रगति अर्थात महामरण की तैयारी
सामान्य व्यक्ति का मस्तिष्क विकृत हो तो वह थोड़े ही व्यक्तियों का अहित कर सकता है। उसी तरह की दुर्बुद्धि वाले लोगों का एक समूह निकल पड़े, तो हानि की सँभावनाएँ निश्चित बढ़ती हैं। किंतु यदि यही रोग र...
होली
होली विशेषांक— 4
पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। ख...
अपनों से अपनी बात- होली का संदेश
होली विशेषांक— 3
मातृभूमि की धूलि मस्तक पर लगाकर देशभक्ति की प्रतिज्ञा लेने का महापर्व है— होली। यह असमानता के अभिशाप को जला देने का पर्व भी है। यह पर्व यह संदेश देता है कि आर्थिक...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 151): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
इन आंदोलनों के एक लाख गाँवों में विस्तार हेतु शान्तिकुञ्ज ने पहला कदम बढ़ाया है। इसके लिए संचालनकेंद्रों की स्थापना की गई है। वहाँ चार-चार नई साइकिलें, चार छोटी बालटियाँ, बिस्तरबंद, संगीत उपकरण, साह...
होली का संदेश (होली विशेषांक— 2)
अनावश्यक और हानिकार वस्तुओं को हटा देने और मिटा देने को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्त्वपूर्ण समझा गया है। और इस दृष्टिकोण को क्रियात्मक रूप देने के लिए होली का त्यौहार बनाया गया है। रास्तों में फैले...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 150): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Read More
हमारी होली (होली विशेषांक— 1)
मैं चाहता हूँ कि आप इस होली पर खूब आनंद मनाएँ और साथ ही यह भी चिंतन करें कि जिसकी यह छाया है, उस अखंड आनंद को मैं कैसे प्राप्त कर सकता हूँ? मेरी युग-युग की प्यास कैसे बुझ सकती है? इस अँधेरे में कहा...

.jpg)
