Dev Sanskriti Vishwavidyalaya Signs MoU with Sambal Drug Deaddiction & Psychiatric Hospital to Strengthen Mental Health Collaboration
Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, Haridwar, has signed a Memorandum of Understanding (MoU) with Sambal Drug Deaddiction & Psychiatric Hospital, Lucknow, to promote collaborative work in the fields of psychology, mental health sciences, and deaddiction studies.
The MoU was signed by Respected Dr. Chinmay Pandya, Pro Vice Chancellor of Dev Sanskriti Vishwavidyalaya, and Prof. Dr. P. K. Khatri, Director of Sambal Drug Deaddiction & Psychiatric Hospital. The agreement establishes a framework for academic and research collaboration between the two institutions.
Through this partnership, both institutions will undertake joint research projects, faculty and staff training programs, and academic exchanges in areas of mutual interest. The collaboration will also focus on organizing seminars, symposia, training sessions, and awareness programs related to mental health, psychological wellbeing, and addiction recovery.
Additionally, the institutions will work together to develop joint grant proposals for national and international funding opportunities and promote interdisciplinary research initiatives in mental health sciences.
This collaboration reflects a shared commitment to advancing mental health research, strengthening academic–clinical partnerships, and creating greater awareness about psychological wellbeing and deaddiction in society.
Recent Post
विशिष्ट सामायिक चिंतन: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) एवं शिक्षा
आज जीवन के हर क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थात ए०आई० (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का बोलबाला है। ए०आई० समाचार की सुर्खियों से आगे जीवन के हर पक्ष का हिस्सा बनती जा रही है। स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिं...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 153): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
कार्यक्रमों में प्रचारात्मक, रचनात्मक और सुधारात्मक अनेक कार्य हैं, जिन्हें घर से बाहर रहते हुए परिस्थितियों के अनुरूप कार्यान्वित किया जा सकता है। प्रचारात्मक स्तर के कार्य— 1. झोला पुस्तकाल...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 152): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
माना कि आज स्वार्थपरता, संकीर्णता और क्षुद्रता ने मनुष्य को बुरी तरह घेर रखा है, तो भी इस धरती को वीर विहीन नहीं कहा जा सकता। 60 लाख साधु-बाबा यदि धर्म के नाम पर घर-बार छोड़कर मारे-मारे फिर सकते हैं...
विज्ञान को शैतान बनने से रोकें:अनियंत्रित प्रगति अर्थात महामरण की तैयारी
सामान्य व्यक्ति का मस्तिष्क विकृत हो तो वह थोड़े ही व्यक्तियों का अहित कर सकता है। उसी तरह की दुर्बुद्धि वाले लोगों का एक समूह निकल पड़े, तो हानि की सँभावनाएँ निश्चित बढ़ती हैं। किंतु यदि यही रोग र...
होली
होली विशेषांक— 4
पुराणकालीन, आदर्शसत्याग्रही, भक्त प्रह्लाद के दमन के लिए हिरण्यकश्यप के छल-प्रपंच सफल न हो सके। उसे भस्म करने के प्रयास में होलिका जल मरी और प्रहलाद तपे कंचन बन गए। ख...
अपनों से अपनी बात- होली का संदेश
होली विशेषांक— 3
मातृभूमि की धूलि मस्तक पर लगाकर देशभक्ति की प्रतिज्ञा लेने का महापर्व है— होली। यह असमानता के अभिशाप को जला देने का पर्व भी है। यह पर्व यह संदेश देता है कि आर्थिक...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 151): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
इन आंदोलनों के एक लाख गाँवों में विस्तार हेतु शान्तिकुञ्ज ने पहला कदम बढ़ाया है। इसके लिए संचालनकेंद्रों की स्थापना की गई है। वहाँ चार-चार नई साइकिलें, चार छोटी बालटियाँ, बिस्तरबंद, संगीत उपकरण, साह...
होली का संदेश (होली विशेषांक— 2)
अनावश्यक और हानिकार वस्तुओं को हटा देने और मिटा देने को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्त्वपूर्ण समझा गया है। और इस दृष्टिकोण को क्रियात्मक रूप देने के लिए होली का त्यौहार बनाया गया है। रास्तों में फैले...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 150): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Read More
हमारी होली (होली विशेषांक— 1)
मैं चाहता हूँ कि आप इस होली पर खूब आनंद मनाएँ और साथ ही यह भी चिंतन करें कि जिसकी यह छाया है, उस अखंड आनंद को मैं कैसे प्राप्त कर सकता हूँ? मेरी युग-युग की प्यास कैसे बुझ सकती है? इस अँधेरे में कहा...

.jpg)
