शताब्दी नगर, बैरागी द्वीप में भोजन पकाने वाली भट्टी का विधिवत उद्घाटन।
शताब्दी नगर, बैरागी द्वीप में 10 जनवरी सायं भोजन पकाने वाली भट्टी का विधिवत उद्घाटन शताब्दी समारोह के दल नायक आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी के कर कमलों द्वारा श्रद्धा एवं उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शांतिकुंज के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं परिजन उपस्थित थे।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने कहा कि यह अवसर सभी के लिए अत्यंत विलक्षण और सौभाग्यपूर्ण है। ऐसे क्षण बार-बार नहीं आते, जब सेवा, समर्पण और सामाजिक सहयोग एक साथ साकार होते हैं। उन्होंने कहा कि इस भट्टी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को सुव्यवस्थित, स्वच्छ एवं समयबद्ध भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा, जो सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने बैरागी द्वीप में कार्यकर्ताओं के विभिन्न शिविरों का भी अवलोकन किया और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह, सकारात्मकता और सेवा भाव से ओतप्रोत वातावरण देखने को मिला।
Recent Post
होली का संदेश (होली विशेषांक— 2)
अनावश्यक और हानिकार वस्तुओं को हटा देने और मिटा देने को हिंदू धर्म में बहुत ही महत्त्वपूर्ण समझा गया है। और इस दृष्टिकोण को क्रियात्मक रूप देने के लिए होली का त्यौहार बनाया गया है। रास्तों में फैले...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 150): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Read More
हमारी होली (होली विशेषांक— 1)
मैं चाहता हूँ कि आप इस होली पर खूब आनंद मनाएँ और साथ ही यह भी चिंतन करें कि जिसकी यह छाया है, उस अखंड आनंद को मैं कैसे प्राप्त कर सकता हूँ? मेरी युग-युग की प्यास कैसे बुझ सकती है? इस अँधेरे में कहा...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 149): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
एक लाख अशोक वृक्ष लगाने का संकल्प पूरा करने में यदि प्रज्ञापरिजन उत्साहपूर्वक प्रयत्न करें तो इतना साधारण निश्चय इतने बड़े जनसमुदाय के लिए तनिक भी कठिन नहीं होना चाहिए। उसकी पूर्ति में कोई अड़चन दीखत...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 148): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
जीवन की बहुमुखी समस्याओं का समाधान, प्रगति-पथ पर अग्रसर होने के रहस्य भरे तत्त्वज्ञान के अतिरिक्त इसी अवधि में भाषण, कला, सुगम संगीत, जड़ी-बूटी उपचार, पौरोहित्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, गृह-उद्योगों का स...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 147): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 146): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
एक-एक लाख की पाँच शृंखलाएँ सँजोने का संकेत हुआ। उसका तात्पर्य है— कली से कमल बनने की तरह खिल पड़ना। अब हमें इस जन्म की पूर्णाहुति में पाँच हव्य सम्मिलित करने पड़ेंगे। वे इस प्रकार हैं—
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 145): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
हमारे निजी जीवन में भगवत्कृपा निरंतर उतरती रही है। चौबीस लक्ष के चौबीस महापुरश्चरण करने का अत्यंत कठोर साधनाक्रम उन्हीं दिनों से लाद दिया गया जब दुधमुँही किशोरावस्था भी पूरी नहीं हो पाई थी। इसके बा...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 144): जीवन के उत्तरार्द्ध के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्धारण
बड़ी और कड़ी परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर ही किसी की महिमा और गरिमा का पता चलता है। प्रतिस्पर्द्धाओं में उत्तीर्ण होने पर ही पदाधिकारी बना जाता है। खेलों में बाजी मारने वाले ही पुरस्कार पाते हैं। खरे...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 143): ‘विनाश नहीं सृजन’— हमारा भविष्यकथन
वर्तमान समस्याएँ एकदूसरे से गुँथी हुई हैं। एक से दूसरी का घनिष्ठ संबंध है। चाहे वह पर्यावरण हो अथवा युद्ध सामग्री का जमाव; बढ़ती अनीति-दुराचार हो अथवा अकाल-महामारी जैसी दैवी आपदाएँ। एक को सुल...

.jpg)
