गायत्री परिवार सेवा-साधना के साथ ज्ञान की दिव्य ज्योति को घर-घर पहुँचा रहा है
देवरिया में सम्पन्न राष्ट्र जागरण 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ में शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि का संदेश
देवरिया। उत्तर प्रदेश
देवरिया जनपद के महाराजा अग्रसेन इंटर कॉलेज के प्रांगण में दिनांक 24 से 27 नवंबर की तिथियों में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ भव्यता के साथ संपन्न हुआ। 26 नवम्बर को दीपयज्ञ के अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति आदरणीय डॉ. चिन्मय पण्ड्या जी ने स्थानीय धर्मप्राण जनमानस, विशेषकर युवाओं को जीवन का उद्देश्य और मानव जीवन की गरिमा का बोध कराया।
आदरणीय डॉ. चिन्मय जी ने कहा कि जीवन ही प्रत्यक्ष देवता है।आवश्यकता इसे ही साधने और सिद्ध करने की है। भोग के लिए तो भगवान ने 84 लाख योनियाँ बनाई हैं, लेकिन मानव जीवन ही ऐसा दुर्लभ अवसर है जब मनुष्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मानवता की सेवा कर नर को नारायण तथा मानव को देवमानव बना सकता है। आत्मा के उत्थान का अवसर केवल मानव योनि में ही मिलता है।
अखिल विश्व गायत्री परिवार सेवा, साधना के उद्देश्य के साथ इसी ज्ञान की ज्योति को घर-घर पहुँचा रहा है। देवरिया के परिजनों ने 24 से 27 नवम्बर 2023 की तिथियों में आयोजित इस महायज्ञ के माध्यम से लगभग एक वर्ष तक चले प्रयाज के कार्यक्रमों द्वारा पूरे क्षेत्र का सघन मंथन किया। शान्तिकुञ्ज प्रतिनिधि डॉ. ज्ञानेश्वर मिश्र तथा श्री मान सिंह वर्मा-उपजोन प्रभारी, वाराणसी के विशिष्ट प्रयासों से 24 नवम्बर को विशाल कलश यात्रा के साथ महायज्ञ का भव्य शुभारंभ हुआ। द्वितीय दिवस सायं काल डॉ. ज्ञानेश्वर मिश्र द्वारा संस्कार परम्परा, विशेषकर यज्ञोपवीत संस्कार पर दिया गया उद्बोधन अत्यंत आकर्षक था, जिसके प्रभाव से 26 नवंबर को बड़ी संख्या में विभिन्न संस्कार हुए। यज्ञ की सफलता में कुशी नगर, गोरखपुर आदि के कार्यकर्त्ताओं का प्रशंसनीय योगदान रहा। विभिन्न व्यवस्थाओं में श्री रामायण शुक्ल, सर्वश्री शांति स्वरूप पाठक, रामतपस्या यादव, अखिलेश राय, अक्षयवर मिश्र, डॉ.
अशोक दीक्षित, देवेंद्र स्वरूप पाठक, दिनेश चंद्र श्रीवास्तव, सुरेंद्र कुशवाहा, जितेंद्र पांडेय, के.के. श्रीवास्तव, अजीत शर्मा, अजय गिरी, डॉ. नागरथ, संजय सिंह, अभय एवं महिला मंडल में डॉ. शकुन्तला दीक्षित, रेनू श्रीवास्तव, कमलेश त्रिपाठी, संतोष त्रिपाठी, सीता मिश्र, मंजू तिवारी, अरुंधती शुक्ला,आशा पाठक इत्यादि का विशेष योगदान रहा। देसंविवि के नवीन पाण्डेय, विकास यादव उपस्थित रहे।
Recent Post
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 139): मनीषी के रूप में हमारी प्रत्यक्ष भूमिका
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 138): मनीषी के रूप में हमारी प्रत्यक्ष भूमिका
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 137): मनीषी के रूप में हमारी प्रत्यक्ष भूमिका
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 136): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
Read More
विश्वास के युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अंतिम आविष्कार और बढ़ता हुआ जोखिम
आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हम मानव-सभ्यता की पूरी ऐतिहासिक यात्रा के ऐसे मोड़ से गुजर रहे हैं, जहाँ technology बाकी सारे संस्थानों से कहीं अधिक तेज़ी से आगे बढ़ रही है। हम लोग ...
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 135): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 134): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 133): इन दिनों हम यह करने में जुट रहे हैं
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 132): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More
हमारी वसीयत और विरासत (भाग 131): स्थूल का सूक्ष्मशरीर में परिवर्तन— सूक्ष्मीकरण
Read More

.jpg)
