विश्वास के युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता: अंतिम आविष्कार और बढ़ता हुआ जोखिम
आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि हम मानव-सभ्यता की पूरी ऐतिहासिक यात्रा के ऐसे मोड़ से गुजर रहे हैं, जहाँ technology बाकी सारे संस्थानों से कहीं अधिक तेज़ी से आगे बढ़ रही है। हम लोग अभी अंदर इसी बात पर चर्चा कर रहे थे कि जो गति आज की तकनीक की है, वह हमारे सामाजिक, नैतिक और शासन-संबंधी ढाँचों से कहीं आगे निकल चुकी है।
मैं अंदर ही अंदर Geoffrey Hinton (जो “godfather of AI” और Turing Award winner हैं) को कोट कर रहा था कि उन्होंने स्वयं कहा है कि “this is a threat to humanity, this is our final invention, इसके बाद humanity कोई और invention करेगी नहीं, और यह हम लोगों का अंतिम invention है।” ऐसे समय में सोचना अनिवार्य हो जाता है कि जो हम बना रहे हैं, वह कहीं गलत हाथों में तो नहीं जा रहा है।
अभी हम लोग अंदर इसी चीज़ को discuss कर रहे थे। मैंने दो उदाहरण दिए।
पहला उदाहरण: Belgium में 2023 में एक व्यक्ति ने आत्महत्या की, because he fell in love with an AI chatbot called “Eliza”, and not only prompted him to commit suicide, it also asked him to meet in the “other dimension” so that they can live forever together. अब आप सोचकर देखिए, यदि ऐसी घटना घटती है तो उसके लिए accountable कौन है?
दूसरा उदाहरण: AI को DeepMind के program में कहा गया कि “आप CAPTCHA को break करिए, AI cannot break it”, but AI tried to recruit a person from TaskRabbit.com so that it can read on its behalf. और जब उस व्यक्ति को suspicion हुआ और उसने पूछा, “Are you an AI asking me to break it?”, तो उसने कहा, “No, no, no, I am a person with visual impairment, I cannot read it.” तो trust भी गया, manipulation आ गई।
पहले के computer systems थे या IT के systems थे, they did not have capacity to manipulate. Now we have got something which has the power to manipulate. और जब power to manipulate आती है, तो पहले के जितने भी systems थे, वे सिर्फ supplier of information थे – you have got a better way to communicate, you have better ways to connect – but now you have got a system which can not only act, predict, modify, but can also manipulate.
तो ऐसे समय में यह है कि सही decision सही समय पर लेना अनिवार्य हो जाता है। और इसी विषय पर चिंतन करने के लिए हम लोग मिले हैं – कि जो power AI की बढ़ रही है, it should be aligned with human values. And the biggest human value is the trust. बिना trust के तो कुछ होता ही नहीं है – कोई relationship नहीं होती, कोई friendship नहीं होती, कोई governance नहीं होती, कोई government relation नहीं होता; ये सब केवल trust के आधार पर ही चलते हैं।
तो इसीलिए number one, trust को बनाए रखना किसी भी system का global imperative हो जाता है।
https://www.awgp.org/en/video?aid=331&id=13508
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